Thursday, April 3, 2025

कब्ज का समाधान

इस चूर्ण को बनाने की विधि (How to Make This Powder)

इस चूर्ण को बनाने के लिए आपको केवल घर में मौजूद 5 चीजों की जरूरत होगी।

सामग्री:

🔹 सौंफ - 50 ग्राम
🔹 
अजवाइन - 50 ग्राम
🔹 
हींग - 5 ग्राम
🔹 
काला नमक - 20 ग्राम
🔹 
हरीतकी (हरड़) चूर्ण - 30 ग्राम

विधि (Step-by-Step Process):

  • सभी सामग्री को एक पैन में धीमी आंच पर 2-3 मिनट तक भून लें ताकि उनमें से नमी निकल जाए।
  • अब इन्हें मिक्सी में डालकर पाउडर बना लें
  • तैयार पाउडर को किसी एयरटाइट डिब्बे में स्टोर करें ताकि यह लंबे समय तक खराब न हो।

इस चूर्ण के सेवन का सही तरीका

✔ खाने के बाद आधा चम्मच चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लें।
✔ कब्ज़ की समस्या हो तो इसे 
रात में सोने से पहले लें
✔ गैस और ब्लोटिंग की समस्या के लिए 
सुबह खाली पेट भी ले सकते हैं

नोट: इस चूर्ण को लंबे समय तक नियमित रूप से लेने से पाचन शक्ति मजबूत होती है और पेट हमेशा हल्का महसूस होता है।

इस चूर्ण के अद्भुत फायदे (Amazing Benefits of This Powder)

  • 100% आयुर्वेदिक और प्राकृतिक: इसमें कोई केमिकल या प्रिज़र्वेटिव नहीं है।
  • पेट की हर समस्या का समाधान: कब्ज़, गैस, एसिडिटी और अपच में असरदार।
  • आंतों की गहरी सफाई करता है: पेट में जमा टॉक्सिन्स (विषैले पदार्थ) को बाहर निकालता है।
  • मेटाबॉलिज्म तेज करता है: 

फैटी लिवर के लिए होमिओपेथिक दवाई

फैटी लीवर एक ऐसी बीमारी है जिससे आजकल काफी लोग जूझ रहे हैं। यह सच है कि शरीर में लिवर एक अभिन्न अंग है जो खाना पचाने से लेकर हमारे ब्लड के लिए भी फायदेमंद है। Fatty Liver की वजह से आपकी जिंदगी में कई अनचाही मुश्किलें आने लगती है।

कहा जाता है कि इससे निजात पाना लोगों के लिए काफी मुश्किल होता है लेकिन आपको बता दे कि होम्योपैथिक में एक दवाई जिससे आप फैटी लीवर की मुश्किलों से निजात पा सकते हैं। खुद डॉक्टर ने इस वीडियो को शेयर करते हुए इसके सेवन के सही तरीके के बारे में बात करती हुई नजर आई है। आइए देखते हैं क्या कहा है उन्होंने।

क्या होते हैं Fatty Liver के लक्षण

जहां तक बात करें फैटी लीवर के सिंपटम की तो गैस बनना, वजन कम होना, पेट फूल जाना सामान्य बात है। इसके अलावा आपके शरीर में खुजली भी होने लगती है। अगर
आप भी Fatty Liver से ग्रसित है तो आप इसकी जांच करवा सकते हैं। फैटी लीवर के लक्षण आपको कभी-कभी सामान्य लग सकते हैं लेकिन यह आपके लिए बाद में खतरनाक साबित हो सकता है।

Fatty Liver में असरदार है यह दवाई

Dr. Teena Homoeopathy ने इंस्टाग्राम चैनल पर एक वीडियो शेयर करते हुए इस बारे में लोगों को पूरी जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि Chelidonium मदर टिंचर आपके फैटी लीवर के लिए होम्योपैथिक दावों में से सबसे बेस्ट है। यह लीवर को बेहतर कार्य करने और Fatty Liver के सिंपटम को काफी हद तक कम करने में मददगार साबित हो सकता है। अगर आप भी फैटी लीवर की समस्या से जूझ रहे हैं तो आप इस दवाई को ट्राई कर सकते है। इस होम्योपैथिक डॉक्टर के मुताबिक दवाई लेने के पहले दिन से आपको असर देखने को मिल सकता है।

कैसे ले Fatty Liver में दवा

वहीं डॉक्टर का कहना है कि इस दवाई को आप 20 ड्रॉप एक चौथाई कप पानी में डालकर एक दिन में तीन बार सेवन कर सकते हैं।

फैटी लिवर में खानपान का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है। लाइफस्टाइल को ठीक रख आप इस बीमारी से निजात पा सकते हैं लेकिन इस होम्योपैथिक दवाई भी मरीजों के लिए उम्मीद की किरण है।


Friday, March 28, 2025

मानसिक शांति और गहरी नींद के लिए आयुर्वेदिक उपाय

नींद की कमी, डिप्रेशन, एंग्जायटी और मानसिक तनाव को दूर करने के लिए यह आयुर्वेदिक योग अत्यंत प्रभावशाली है।

✨ औषधि निर्माण विधि ✨
नीचे दिए गए सभी घटकों को समान रूप से मिलाकर बारीक पाउडर बना लें

1️⃣ गौजबान – 100 ग्राम
2️⃣ किशनीज़ – 100 ग्राम
3️⃣ जायफल – 100 ग्राम
4️⃣ दालचीनी – 50 ग्राम
5️⃣ संदल सफ़ेद – 50 ग्राम

🌿 सेवन विधि –
▪️ 3 ग्राम (लगभग आधा चम्मच) पाउडर सुबह-शाम गुनगुने पानी के साथ लें।
▪️ लगातार 2 महीने तक सेवन करने से मानसिक रोग जड़ से समाप्त हो सकते हैं।
▪️ पहले दिन से ही असर दिखने लगता है।

✅ लाभ
✔️ मानसिक तनाव, एंग्जायटी और डिप्रेशन में राहत।
✔️ अनिद्रा दूर कर गहरी और प्राकृतिक नींद में सहायक।
✔️ नींद की गोलियों की आदत को समाप्त करने में सहायक।

⚠️ विशेष सावधानी
▪️ इस औषधि को अनुशासनपूर्वक नियमित रूप से लें।
▪️ मन को शांत रखने के लिए योग व ध्यान करें।
▪️ रात्रि में मोबाइल स्क्रीन से बचें और सोने से पहले हल्का गुनगुना दूध लें।

कर्मो की दौलत

एक राजा था जिसने अपने राज्य में क्रूरता से बहुत सी दौलत (शाही खज़ाना) इकट्ठा करके आबादी से बाहर जंगल में एक सुनसान जगह पर बनाए तहखाने में खुफिया तौर पर छुपा दिया। खजाने की सिर्फ दो चाबियाँ थी, एक चाबी राजा के पास और एक उसके खास मंत्री के पास। इन दोनों के अलावा किसी को भी उस खुफिया खजाने का राज मालूम ना था।

एक दिन किसी को बताए बगैर राजा अकेले अपने खजाने को देखने निकल गया। तहखाने का दरवाजा खोल वह अन्दर दाखिल हुआ और अपने खजाने को देख-देख कर खुश हो रहा था और खजाने की चमक से सुकून पा रहा था।

उसी वक्त मंत्री भी उस इलाके से निकला और उसने देखा की खज़ाने का दरवाजा खुला है तो वो हैरान हो गया और उसे ख्याल आया कि कहीं कल रात जब मैं खज़ाना देखने आया था तब कहीं खज़ाने का दरवाजा खुला तो नहीं रह गया मुझसे ? उसने जल्दी-जल्दी खज़ाने का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया और वहाँ से चला गया। उधर खज़ाने को निहारने के बाद राजा जब संतुष्ट हुआ तो दरवाजे के पास आया। अरे ये क्या ! दरवाजा तो बाहर से बंद है। उसने जोर-जोर से दरवाज़ा पीटना शुरू किया पर वहाँ उसकी आवाज़ सुनने वाला कोई ना था।

राजा चिल्लाता रहा पर अफसोस कोई ना आया। वो थक हार के खज़ाने को देखता रहा। अब राजा भूख और प्यास से बेहाल हो रहा था। उसकी हालत पागलों सी हो गई थी। वो रेंगता रेंगता हीरों के संदूक के पास गया और बोला- "ए दुनिया के नायाब हीरों, मुझे एक गिलास पानी दे दो।" फिर मोती सोने चांदी के पास गया और बोला- "ए मोती चांदी सोने के खज़ाने, मुझे एक वक़्त का खाना दे दो।" राजा को ऐसा लगा कि हीरे मोती उससे बात कह रहे हों कि तेरी सारी ज़िन्दगी की कमाई तुझे एक गिलास पानी और एक समय का खाना नही दे सकती। राजा भूख प्यास से बेहोश हो कर गिर गया।

जब राजा को होश आया तो सारे मोती हीरे बिखेर के दीवार के पास अपना बिस्तर बनाया और उस पर लेट गया। वो दुनिया को एक सन्देश देना चाहता था लेकिन उसके पास कागज़ और कलम नही था। राजा ने पत्थर से अपनी उंगली फोड़ी और बहते हुए खून से दीवार पर कुछ लिख दिया।

उधर मंत्री और पूरी सेना लापता राजा को ढूंढ रही थी पर उनको राजा नही मिला। कई दिन बाद जब मंत्री राजा के खज़ाने को देखने आया तो उसने देखा कि राजा हीरे ज़वाहरात के बिस्तर पर मरा पड़ा है और उसकी लाश को कीड़े मकोड़े खा रहे हैं। राजा ने दीवार पर खून से लिखा हुआ था- "ये सारा धन एक घूंट पानी और एक निवाला नही दे सका।"

यही अंतिम सच है। आखिरी समय आपके साथ आपके कर्मों की दौलत जाएगी। चाहे आपने कितने ही हीरे, पैसा, सोना, चांदी इकट्ठा किया हो, सब यहीं रह जाएगा। इसीलिए जो जीवन आपको प्रभु ने उपहार स्वरूप दिया है,उसमें अच्छे कर्म लोगों की भलाई के काम कीजिए बिना किसी स्वार्थ के और अर्जित कीजिए अच्छे कर्मो की अनमोल दौलत।जो आपके सदैव काम आएगी..!!

पुनर्जीवनवर्धक पुनर्नवा

 इस औषधि का रोज सिर्फ 1 चम्मच बुढ़ापे में 20 साल की जवानी भर दे क्योंकि

आज हम आपको ऐसी औषध के बारे में बताएँगे जो शरीर के अँगो को पुनः नया जीवन दे सकती है, जो कैन्सर के मरीज़ों के लिए आयुर्वेद जगत की संजीवनी है जिसका नाम पुनर्नवा है। पुर्ननवा संस्कृत के दो शब्द पुनः अर्थात ‘फिर’ और नव अर्थात ‘नया’ से बना है।

पुर्ननवा औषधि में भी अपने नाम के अनुरूप ही शरीर को पुनः नया कर देने वाले गुण पाए जाता है। इसलिए इसे रोगों से लड़ने से लेकर कैंसर के इलाज तक में उपयोग किया जाता है।इसकी 1 चम्मच भोजन के साथ अर्थात सब्जी में मिलाकर सेवन करने से बुढापा नही आता अर्थात बूढ़ा व्यक्ति भी जवाँ बना रहता है क्योंकि इससे शरीर के सभी अंग का पुनः नयी कोशिका का निर्माण होता रहता है। ‘शरीर पुनर्नवं करोति इति पुनर्नवा’ जो अपने रक्तवर्धक एवं रसायन गुणों द्वारा सम्पूर्ण शरीर को अभिनव स्वरूप प्रदान करे, वह है ‘पुनर्नवा’। यह हिन्दी में साटी, साँठ, गदहपुरना, विषखपरा, गुजराती में साटोड़ी, मराठी में घेटुली तथा अंग्रेजी में ‘हॉगवीड’ नाम से जानी जाती है।

मूँग या चने की दाल मिलाकर इसकी बढ़िया सब्जी बनती है, जो शरीर की सूजन, मूत्ररोगों (विशेषकर मूत्राल्पता), हृदयरोगों, दमा, शरीरदर्द, मंदाग्नि, उलटी, पीलिया, रक्ताल्पता, यकृत व प्लीहा के विकारों, बुढ़ापे को रोकता है, जवाँ बनाएंआदि में फायदेमंद है। इसके ताजे पत्तों के 15-20 मि.ली. रस में चुटकी भर काली मिर्च व थोड़ा-सा शहद मिलाकर पीना भी हितावह है । भारत में यह सब्जी सर्वत्र पायी जाती है।

पुनर्नवा का शरीर पर होने वाला रसायन कार्य :

दूध, अश्वगंधा आदि रसायन द्रव्य रक्त-मांसादि को बढ़ाकर शरीर का बलवर्धन करते हैं परंतु पुनर्नवा शरीर में संचित मलों को मल-मूत्रादि द्वारा बाहर निकालकर शरीर के पोषण का मार्ग खुला कर देती है ।बुढ़ापे में शरीर में संचित मलों का उत्सर्जन यथोचित नहीं होता । पुनर्नवा अवरूद्ध मल को हटाकर हृदय, नाभि, सिर, स्नायु, आँतों व रक्तवाहिनियों को शुद्ध करती है, जिससे मधुमेह, हृदयरोग, दमा, उच्च रक्तदाब आदि बुढ़ापे में होनेवाले कष्टदायक रोग उत्पन्न नहीं होते। यह हृदय की क्रिया में सुधार लाकर हृदय का बल बढ़ाती है । पाचकाग्नि को बढ़ाकर रक्तवृद्धि करती है । विरूद्ध आहार व अंग्रेजी दवाओं के अतिशय सेवन से शरीर में संचित हुए विषैले द्रव्यों का निष्कासन कर रोगों से रक्षा करती है।

बाल रोगों में लाभकारी पुनर्नवा शरबत :

पुनर्नवा के पत्तों के 100 ग्राम स्वरस में मिश्री चूर्ण 200 ग्राम व पिप्पली (पीपर) चूर्ण 12 ग्राम मिलाकर पकायें तथा चाशनी गाढ़ी हो जाने पर उसको उतार के छानकर शीशी में रख लें । इस शरबत को 4 से 10 बूँद की मात्रा में (आयु अनुसार) रोगी बालक को दिन में तीन-चार बार चटायें । खाँसी, श्वास, फेपडों के विकार, बहुत लार बहना, जिगर बढ़ जाना, सर्दी-जुकाम, हरे-पीले दस्त, उलटी तथा बच्चों की अन्य बीमारियों में बाल-विकारशामक औषधि कल्प के रूप में इसका उपयोग बहुत लाभप्रद है ।


आदर्श शिष्य

 बहुत समय पहले की बात है, किसी नगर में एक बेहद प्रभावशाली महंत रहते थे। उन के पास शिक्षा लेने हेतु दूर दूर से शिष्य आते थे। एक दिन एक शिष्य ने महंत से सवाल किया, स्वामीजी आपके गुरु कौन है? आपने किस गुरु से शिक्षा प्राप्त की है? महंत शिष्य का सवाल सुन मुस्कुराए और बोले, मेरे हजारो गुरु हैं! यदि मै उनके नाम गिनाने बैठ जाऊ तो शायद महीनो लग जाए। लेकिन फिर भी मै अपने तीन गुरुओ के बारे मे तुम्हे जरुर बताऊंगा।

"मेरा पहला गुरु था एक चोर"
एक बार में रास्ता भटक गया था और जब दूर किसी गाव में पंहुचा तो बहुत देर हो गयी थी। सब दुकाने और घर बंद हो चुके थे। लेकिन आख़िरकार मुझे एक आदमी मिला जो एक दीवार में सेंध लगाने की कोशिश कर रहा था। मैने उससे पूछा कि मै कहा ठहर सकता हूं, तो वह बोला की आधी रात हो गयी है, इस समय आपको कहीं कोई भी आसरा मिलना बहुत मुश्किल होंगा, लेकिन आप चाहे तो मेरे साथ आज कि रात ठहर सकते हो। मै एक चोर हु और अगर एक चोर के साथ रहने में आपको कोई परेशानी नहीं होंगी तो आप मेरे साथ रह सकते है।

वह इतना प्यारा आदमी था कि मै उसके साथ एक रात कि जगह एक महीने तक रह गया ! वह हर रात मुझे कहता कि मै अपने काम पर जाता हूं, आप आराम करो, प्रार्थना करो। जब वह काम से आता तो मै उससे पूछता की कुछ मिला तुम्हे? तो वह कहता की आज तो कुछ नहीं मिला पर अगर भगवान ने चाहा तो जल्द ही जरुर कुछ मिलेगा। वह कभी निराश और उदास नहीं होता था, और हमेशा मस्त रहता था। कुछ दिन बाद मैं उसको धन्यवाद करके वापस आपने घर आ गया ,

जब मुझे ध्यान करते हुए सालों-साल बीत गए थे और कुछ भी नहीं हो रहा था तो कई बार ऐसे क्षण आते थे कि मैं बिलकुल हताश और निराश होकर साधना छोड़ लेने की ठान लेता था। और तब अचानक मुझे उस चोर की याद आती जो रोज कहता था कि भगवान ने चाहा तो जल्द ही कुछ जरुर मिलेगा और इस तरह मैं हमेशा अपना ध्यान लगता और साधना में लीन रहता !

"मेरा दूसरा गुरु एक कुत्ता था"
एक बहुत गर्मी वाले दिन मै कही जा रहा था और मैं बहुत प्यासा था और पानी के तलाश में घूम रहा था कि सामने से एक कुत्ता दौड़ता हुआ आया। वह भी बहुत प्यासा था। पास ही एक नदी थी। उस कुत्ते ने आगे जाकर नदी में झांका तो उसे एक और कुत्ता पानी में नजर आया जो की उसकी अपनी ही परछाई थी। कुत्ता उसे देख बहुत डर गया। वह परछाई को देखकर भौकता और पीछे हट जाता, लेकिन बहुत प्यास लगने के कारण वह वापस पानी के पास लौट आता। अंततः, अपने डर के बावजूद वह नदी में कूद पड़ा और उसके कूदते ही वह परछाई भी गायब हो गई। उस कुत्ते के इस साहस को देख मुझे एक बहुत बड़ी सिख मिल गई। अपने डर के बावजूद व्यक्ति को छलांग लगा लेनी होती है। "
सफलता उसे ही मिलती है जो व्यक्ति डर का साहस से मुकाबला करता है"

"मेरा तीसरा गुरु एक छोटा बच्चा है"
मै एक गांव से गुजर रहा था कि मैंने देखा एक छोटा बच्चा एक जलती हुई मोमबत्ती ले जा रहा था। वह पास के किसी मंदिर में मोमबत्ती रखने जा रहा था। मजाक में ही मैंने उससे पूछा की क्या यह मोमबत्ती तुमने जलाई है? वह बोला, जी मैंने ही जलाई है। तो मैंने उससे कहा की एक क्षण था जब यह मोमबत्ती बुझी हुई थी और फिर एक क्षण आया जब यह मोमबत्ती जल गई। क्या तुम मुझे वह स्त्रोत दिखा सकते हो जहा से वह ज्योति आई?

वह बच्चा हँसा और मोमबत्ती को फूंख मारकर बुझाते हुए बोला, अब आपने ज्योति को जाते हुए देखा है। कहा गई वह? आप ही मुझे बताइए।

मेरा अहंकार चकनाचूर हो गया, मेरा ज्ञान जाता रहा। और उस क्षण मुझे अपनी ही मूढ़ता का एहसास हुआ। तब से मैंने कोरे ज्ञान से हाथ धो लिए।

शिष्य होने का अर्थ क्या है? शिष्य होने का अर्थ है पुरे अस्तित्व के प्रति खुले होना। हर समय हर ओर से सीखने को तैयार रहना।कभी किसी कि बात का बूरा नहि मानना चाहिए, किसी भी इंसान कि कही हुइ बात को ठंडे दिमाग से एकांत में बैठकर सोचना चाहिए के उसने क्या-क्या कहा और क्यों कहा तब उसकी कही बातों से अपनी कि हुई गलतियों को समझे और अपनी कमियों को दूर् करे ।

जीवन का हर क्षण, हमें कुछ न कुछ सीखने का मौका देता है। हमें जीवन में हमेशा एक शिष्य बनकर अच्छी बातो को सीखते रहना चाहिए। यह जीवन हमें आये दिन किसी न किसी रूप में किसी गुरु से मिलाता रहता है, यह हम पर निर्भर करता है कि क्या हम उस महंत की तरह एक शिष्य बनकर उस गुरु से मिलने वाली शिक्षा को ग्रहण कर पा रहे हैं की नहीं !

Tuesday, March 25, 2025

स्वास्थ्य के नियम

 अपने डॉक्टर खुद बनें और इस पोस्ट को सेव करके सुरक्षित कर लें।

1 = केवल सेंधा नमक प्रयोग करें, थायराईड, बी पी और पेट ठीक होगा।

2 = केवल स्टील का कुकर ही प्रयोग करें, अल्युमिनियम में मिले हुए लेड से होने वाले नुकसानों से बचेंगे

3 = कोई भी रिफाइंड तेल ना खाकर केवल तिल, मूंगफली, सरसों और नारियल का प्रयोग करें। रिफाइंड में बहुत केमिकल होते हैं जो शरीर में कई तरह की बीमारियाँ पैदा करते हैं ।

4 = सोयाबीन बड़ी को 2 घण्टे भिगो कर, मसल कर ज़हरीली झाग निकल कर ही प्रयोग करें।

5 = रसोई में एग्जास्ट फैन जरूरी है, प्रदूषित हवा बाहर करें।

6 = काम करते समय स्वयं को अच्छा लगने वाला संगीत चलाएं। खाने में भी अच्छा प्रभाव आएगा और थकान कम होगी।

7 = देसी गाय के घी का प्रयोग बढ़ाएं। अनेक रोग दूर होंगे, वजन नहीं बढ़ता।

8 = ज्यादा से ज्यादा मीठा नीम/कढ़ी पत्ता खाने की चीजों में डालें, सभी का स्वास्थ्य ठीक करेगा।

9 = ज्यादा से ज्यादा चीजें लोहे की कढ़ाई में ही बनाएं। आयरन की कमी किसी को नहीं होगी।

10 = भोजन का समय निश्चित करें, पेट ठीक रहेगा। भोजन के बीच बात न करें, भोजन ज्यादा पोषण देगा।

11 = नाश्ते में अंकुरित अन्न शामिल करें। पोषक विटामिन और फाइबर मिलेंगें।

12 = सुबह के खाने के साथ देशी गाय के दूध का बना ताजा दही लें, पेट ठीक रहेगा।

13 = चीनी कम से कम प्रयोग करें, ज्यादा उम्र में हड्डियां ठीक रहेंगी।

14 = चीनी की जगह बिना मसले का गुड़ या देशी शक्कर लें।

15 = छौंक में राई के साथ कलौंजी का भी प्रयोग करें, फायदे इतने कि लिख ही नहीं सकते।

16 = चाय के समय, आयुर्वेदिक पेय की आदत बनाएं व निरोग रहेंगे।

17 = एक डस्टबिन रसोई में और एक बाहर रखें, सोने से पहले रसोई का कचरा बाहर के डस्ट बिन में डालें।

18 = रसोई में घुसते ही नाक में घी या सरसों का तेल लगाएं, सर और फेफड़े स्वस्थ रहेंगें।

19 = करेले, मैथी और मूली यानि कड़वी सब्जियां भी खाएँ, रक्त शुद्ध होता है।

पाइल्स के चरण और उपचार

पाइल्स क्या है?

दोस्तों, पाइल्स एक तरह का मांस का ढेर होता है, जो हमारे गुदा के अंदर या उसके आसपास बन सकता है। यह मांस खून की नसों और कुछ टिशूज़ से मिलकर बनता है। अब होता क्या है? जब हमें लंबे वक्त तक कब्ज की परेशानी रहती है, तो पॉटी करते समय हमें जोर लगाना पड़ता है। इस जोर की वजह से गुदा के आसपास की खून की नसों पर दबाव पड़ता है। धीरे-धीरे ये नसें सूजने लगती हैं, फूलने लगती हैं। फिर एक समय ऐसा आता है कि ये नसें इतनी ज्यादा फूल जाती हैं कि हमेशा के लिए मोटी हो जाती हैं और एक मांस के ढेर की शक्ल ले लेती हैं। यही ढेर, दोस्तों, पाइल्स कहलाता है।

पाइल्स की चार ग्रेड्स

दोस्तों, अब बात करते हैं पाइल्स की चार ग्रेड्स की, यानी इसे चार हिस्सों में बांटा गया है।

पहली ग्रेड: इसमें पाइल्स की सूजन गुदा के अंदर होती है और बाहर से दिखाई नहीं देती। बस अंदर ही मांस का ढेर रहता है।

सेकंड ग्रेड: इसमें क्या होता है कि मांस का ढेर गुदा के अंदर तो रहता है, लेकिन जब आप पॉटी करने जाते हैं, तो ये बाहर निकल आता है। आप इसे महसूस कर सकते हैं। फिर पॉटी करने के बाद ये अपने आप वापस अंदर चला जाता है। यही है सेकंड ग्रेड।

थर्ड ग्रेड: अब इसमें मांस का ढेर हमेशा के लिए बाहर आ जाता है। आपको हर वक्त लगेगा कि गुदा के आसपास कुछ मांस जैसा है। ये अपने आप अंदर नहीं जाता, लेकिन अगर आप उंगली से धक्का देंगे, तो ये अंदर जा सकता है। ये होता है थर्ड ग्रेड।

फोर्थ ग्रेड: ये सबसे गंभीर टाइप का पाइल्स है। इसमें मांस का ढेर इतना बड़ा हो जाता है कि वो बाहर निकलने के बाद अंदर जा ही नहीं पाता। चाहे आप इसे धक्का दें, तब भी ये गुदा के अंदर नहीं जाएगा। ये हमेशा बाहर ही रहता है।

तो दोस्तों, ये हैं पाइल्स की चार अलग-अलग कैटेगरी। इन्हें इस आधार पर बांटा गया है कि आपकी पाइल्स की परेशानी कितनी हल्की या गंभीर है।

पाइल्स का इलाज

अब जहां तक बात आती है फर्स्ट ग्रेड, सेकंड ग्रेड और थर्ड ग्रेड पाइल्स की तो ये आमतौर पे कंज़र्वेटिव ट्रीटमेंट की मदद से ठीक किया जा सकता है। लेकिन फोर्थ ग्रेड पाइल्स क्योंकि काफी ज्यादा सिरीयस होता है तो इसमें अक्सर सर्जरी सजेस्ट की जाती है। वैसे बहुत सारे डॉक्टर्स ऐसे हैं जो कि फर्स्ट ग्रेड, सेकंड ग्रेड और थर्ड ग्रेड में भी कई बार सर्जरी सजेस्ट कर देते हैं और अक्सर लोग इस तरह की सर्जरीज़ कराने से काफी ज्यादा डरते हैं और उसके डरने की वजह भी है क्योंकि एक काफी कॉम्प्लिकेटेड सा प्रोसेस होता है, काफी पेनफुल भी हो सकता है।

तो अगर आप इस तरह के कोई पेशेंट हैं जिसको किसी डॉक्टर ने सर्जरी सजेस्ट की है फर्स्ट ग्रेड, सेकंड ग्रेड या थर्ड ग्रेड पाइल्स के केस में या फिर आपको ऐसे पेशेंट हैं जो ऑलरेडी सर्जरी करा चुके हैं लेकिन सर्जरी कराने के बाद वापस से आपकी पाइल्स जो है वो बढ़ गई है जो कि एक बहुत ही कॉमन फिनोमिना है। अक्सर जब आप सर्जरी कराते हैं उसके बाद रिकरेंस के चांस बहुत ज्यादा होते हैं पाइल्स में। तो अगर इस तरह की कैटेगरी में आप आते हैं और इसको कंज़र्वेटिव ट्रीटमेंट की मदद से या मैं कह सकता हूं कि अपने घर पे कुछ होम रेमेडीज़ की मदद से अगर ठीक करना चाहते हैं तो आज जो मैं आपको ट्रीटमेंट बताने वाला हूं दोस्तों ये काफी ज्यादा आपकी मदद करने वाला है।

क्योंकि इसमें जितनी भी रेमेडीज़ आज मैं आपको बताऊंगा ये पहली चीज तो आपके घर में बहुत ही आसानी से आपको मिल जाएंगी और इनको आप ऑलरेडी भी यूज़ करते हैं अलग-अलग फॉर्म्स में। बट इसको अगर इस तरह से जैसे मैं आपको बताने वाला हूं आप ट्राय यूज़ करेंगे तो उससे आपको पाइल्स में काफी ज्यादा हेल्प मिलेगी। तो चलिए अब जान लेते हैं कि यह कौन-कौन सी होम रेमेडीज़ हैं, इनको आपको कैसे यूज़ करना है और कैसे यह आपको फायदा पहुंचाएंगे।

1. रात का उपचार: कैस्टर ऑयल (अरंडी का तेल)

सबसे पहली चीज़ जो आपको करनी है, वह है रात को सोने से एक घंटा पहले एक गिलास गर्म दूध के साथ कैस्टर ऑयल लेना। कैस्टर ऑयल यानी कि अरंड का तेल जो होता है दोस्तों, ये एंटी-इन्फ्लेमेटरी होता है, एंटीऑक्सीडेंट प्रॉपर्टीज़ इसके अंदर होती हैं और एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल भी होता है और इसको अगर आप लोकली अप्लाई करते हैं, तो यह आपको पेन में भी काफी ज्यादा हेल्पफुल होता है।

तो आपको करना क्या है:

  • रात को सोने से एक घंटा पहले आपको एक गिलास गर्म दूध लेना है और उस दूध के अंदर आपको मिलाना है 3 ml कैस्टर ऑयल। 3ml कैस्टर ऑयल मिलाके आपको यह दूध रात को सोने से 1 घंटा पहले पी लेना है।
  • इसके साथ-साथ आपको कैस्टर ऑयल लोकली भी लगाना है अपनी पाइल्स के ऊपर। लोकली लगाने के लिए आप थोड़ा सा कैस्टर ऑयल ले लीजिए और अपनी उंगली की मदद से, या फिर किसी कॉटन की मदद से, या किसी ईयर बड्स की मदद से। अगर आपको इंटरनल पाइल्स है, तो उस केस में आपको ईयर बड्स लेना पड़ेगा, क्योंकि अंदर की तरफ आप उंगली से नहीं शायद लगा पाएंगे। तो या तो अपनी कॉटन ले लीजिए कोई, या फिर ईयर बड ले लीजिए, या फिर उंगली पे लगा के उसको लोकली अप्लाई करिए उस मास के ऊपर, जो आपकी पाइल्स का है।

लोकली जब आप इसको अप्लाई करेंगे, तो उससे आपको पेन में और जलन में काफी ज्यादा अच्छा रिजल्ट मिलेगा और ये दोनों ही चीज़ें आपकी काफी हद तक कम हो जाएंगी। इसके साथ-साथ अगर आप इसको रात को सोते टाइम ले भी रहे हैं पीने के लिए, जैसा कि मैंने आपको बताया दूध में डाल के, तो उससे भी आपकी जो पेन, इंफ्लेमेशन, स्वेलिंग है, वो भी कम होगी। आपका जो मास है पाइल्स का, वो भी श्रिंक होना शुरू होगा और वहां पर इंफेक्शन के चांसेस भी काफी ज्यादा कम हो जाएंगे। और यह सभी चीज़ें मिलकर आपको काफी हेल्प प्रोवाइड करेंगी पाइल्स को कम करने के लिए और उससे निजात पाने के लिए।

इसके साथ-साथ कैस्टर ऑयल जो होता है, ये पेट के अंदर जो हमारे स्टूल होते हैं, उनको सॉफ्टन करने का काम भी करता है, यानी उनको नरम बनाता है और आपको डिफिकेट में आसानी पैदा करता है। क्रॉनिक से क्रॉनिक कॉन्स्टिपेशन, या आपके पेट में अगर पुराने से पुराने स्टूल जमा हो गए हैं, जो कि सख्त हो जाते हैं और काफी पेनफुल होते हैं और यह चीज़ बहुत कॉमनली देखी जाती है पाइल्स के पेशेंट्स के अंदर। तो ऐसे लोगों के अंदर भी कैस्टर ऑयल पीने से काफी ज्यादा हेल्प मिलती है, क्योंकि जो आपका स्टूल है, वो सॉफ्टन हो रहा है और उसके साथ-साथ आपको डिफिकेट करने में भी आसानी हो रही है। तो उससे स्ट्रेन भी आपके एनस पे कम पड़ता है और इसकी वजह से भी आपको रिकवर करने में आसानी होती है।

2. रात का दूसरा उपचार: त्रिफला

दूसरी चीज़ जो आपको इस्तेमाल करनी है दोस्तों, वह है त्रिफला। त्रिफला जो है, यह एक आयुर्वेदिक मेडिसिन है, जो कि बनती है तीन जड़ी-बूटियों की मदद से। इसमें यूज़ होता है आमला, हरीतकी और बहेड़ा। यह तीनों चीज़ें बराबर-बराबर क्वांटिटी में ली जाती हैं और इनको पाउडर करके तैयार किया जाता है त्रिफला।

त्रिफला को आपको रात को सोते समय बिल्कुल, जब आप सोने के लिए लेट, उससे जस्ट पहले आपको लेना है। ये त्रिफला पाउडर करीब 5 ग्राम, यानी एक चम्मच त्रिफला पाउडर आप ले लीजिए और इसको मिला लीजिए एक गिलास गर्म पानी के अंदर। अगर आप मिलाना नहीं चाहते हैं, तो आप डायरेक्टली भी फांक सकते हैं। मुंह में अपने एक चम्मच ये त्रिफला पाउडर आप डालिए और ऊपर से गर्म पानी पी लीजिए और इसको स्वॉलो कर लीजिए एज़ इट इज़। या फिर आप इसे पानी में भी मिला सकते हैं और उसके बाद भी इसको इस्तेमाल कर सकते हैं।

त्रिफला पाउडर जो है दोस्तों, यह क्रॉनिक कॉन्स्टिपेशन के लिए एक बहुत ही अचूक होम रेमेडी है। अगर आप इसको रेगुलर इस्तेमाल करेंगे, तो इससे क्या होगा कि कॉन्स्टिपेशन की जो शिकायत बहुत आम तौर पे पाइल्स के पेशेंट्स के अंदर मिलती है, वो ठीक होनी शुरू हो जाएगी। और इसके साथ-साथ जो त्रिफला पाउडर है, इसके अंदर ऐस्ट्रिजेंट प्रॉपर्टीज़ भी होती हैं। ऐस्ट्रिजेंट प्रॉपर्टी का मतलब है कि यह आपकी नसों के अंदर कसाव पैदा करता है और ब्लीडिंग को रोकने का काम करता है। और यह सभी चीज़ें मिलकर आपको पाइल्स के केस में काफी अच्छे रिजल्ट प्रोवाइड करती हैं।

तो दोस्तों, रात में आपको क्या-क्या करना है, वह तो आप समझ गए हैं। पहली चीज़ आपको करना है, एक ग्लास गर्म दूध के अंदर आपको कैस्टर ऑयल मिलाकर लेना है सोने से एक घंटा पहले और बिल्कुल सोते टाइम आपको त्रिफला पाउडर लेना है पानी के साथ।अब रात में तो आपको यह सब करना है।

3. सुबह का उपचार: सौंफ और हींग का फॉर्मूला

सुबह में, जब दोस्तों आप सवेरे उठेंगे, तो आपको इस्तेमाल करना है एक फॉर्मूला, जिसका जो नुस्खा है, वह मैं आपको अभी बता देता हूं। इस नुस्खे को बनाने के लिए आपको चाहिए सौंफ और हींग।

सबसे पहले आपको क्या करना है:

  • थोड़ी सी सौंफ ले लीजिए, 100 ग्राम या 200 ग्राम, जितना भी आप चाहें, उतनी सौंफ ले लीजिए और इसको एक नॉन-स्टिकी तवे के ऊपर आप हल्के से रोस्ट कर लीजिए। बहुत हल्की आंच पे आपको रोस्ट करना है, तेज आंच पे रोस्ट नहीं करना है। जलनी नहीं चाहिए। बिल्कुल हल्की-हल्की ब्राउनिश सा कलर आपकी सौंफ के ऊपर आ जाना चाहिए।
  • इसको रोस्ट करने के बाद आप एक मिक्सर ग्राइंडर के अंदर डालिए सौंफ को और उसको अच्छी तरह से पीस लीजिए।
  • जब ये सौंफ आपकी अच्छी तरह से पीस जाए, तो उसको एक सूती कपड़े के अंदर या किसी बारीक छन्नी के अंदर आप छान लीजिए और ये जो फाइन पाउडर आपको मिला है, इस फाइन पाउडर को आप एक एयर टाइट कंटेनर के अंदर स्टोर करके रख लीजिए।
  • रोज़ाना सुबह जब भी आप उठते हैं, तो एक चम्मच आपको लेना है यह पाउडर सौंफ का और इसके अंदर आपको मिलाना है एक चुटकी हींग। ये दोनों चीज़ें मिलाके आपको सुबह खाली पेट एक चम्मच फांकना है और ऊपर से गुनगुना पानी आपको पी लेना है।

सौंफ जो है दोस्तों, ये आपके डाइजेस्टिव ट्रैक्ट के लिए एक बहुत अच्छी चीज़ है और पाइल्स में भी इसका काफी अच्छा इफेक्ट मिलता है। आपके पेट में जो कॉन्स्टिपेशन होता है, उसको भी कम करती है, सूजन को भी कम करती है और ओवरऑल जो आपका डाइजेशन है, उसको इंप्रूव करके लीवर को भी स्ट्रेंथ करती है सौंफ। इसके साथ-साथ जो हींग है, ये एक बहुत ही बढ़िया आयुर्वेदिक रेमेडी मानी जाती है पाइल्स के लिए। ये आपके पाइल्स के अंदर होने वाली जलन को, दर्द को और सूजन को तो ठीक करती ही करती है, इसके साथ-साथ अगर आपको ब्लीडिंग पाइल्स है, तो उस केस में भी इसका काफी अच्छा इफेक्ट देखा जाता है और जो पाइल्स का मास है, उसको श्रिंक करने में भी काफी ज्यादा इफेक्टिव मानी जाती है हींग।

तो यह जो फॉर्मूला है, इन दोनों चीज़ों को मिलाने के बाद यह आपको लेना है सुबह खाली पेट, नाश्ता करने से करीब आधा घंटे पहले।

इन उपायों का प्रभाव

दोस्तों, ये तीनों चीज़ें, यानी कैस्टर ऑयल, त्रिफला और ये तीसरा जो रेमेडी मैंने आपको बताई सौंफ और हींग वाली, ये तीनों चीज़ें आपको करीब दो हफ्ते तक रेगुलर इस्तेमाल करनी हैं और विद इन टू वीक्स ही आप देखेंगे कि आपकी पाइल्स के पेन में, स्वेलिंग में, अगर आपको ब्लीडिंग होती है, तो ब्लीडिंग के केस में, या फिर अगर आपको ब्लीडिंग नहीं है और सिर्फ बादी बवासीर है, वहां पे मवाद या कुछ ऐसा रिसाव होता है, तो उन सभी केसेज़ में आपको काफी ज्यादा अच्छे रिजल्ट्स मिलेंगे।

विदन टू वीक्स ही आपको मोस्ट प्रोबेबली ये इफेक्ट्स दिखने लग जाते हैं। लेकिन इट ऑल डिपेंड्स कि आपको कितने समय से प्रॉब्लम है और कितनी ज्यादा सीवियर प्रॉब्लम है। कोई भी प्रॉब्लम जितनी ज्यादा पुरानी होती है, उसको ठीक करना भी उतना ही ज्यादा मुश्किल होता है और वह ठीक होने में उतना ही ज्यादा टाइम भी लेती है। तो अगर आपको ज्यादा ही पुरानी पाइल्स हैं, या ऑलरेडी आपकी सर्जरीज़ हो चुकी हैं, या फिर आप थर्ड ग्रेड पाइल्स के पेशेंट हैं, तो उस केस में आपको थोड़ा पेशेंस रखने पड़ सकते हैं और आपको दो हफ्ते से ज्यादा वक्त भी लग सकता है।

इसके साथ-साथ दोस्तों, अगर आपकी प्रॉब्लम ज्यादा सीरियस है, तो आप जो लोकल अप्लाई कर रहे थे कैस्टर ऑयल, वो आप बजाय एक टाइम के दो टाइम भी इस्तेमाल कर सकते हैं। यानी रात को सोते टाइम तो आप लगाएंगे ही लोकली अपने पाइल्स के ऊपर, आप सुबह के टाइम में भी नहाने के बाद उसको इस्तेमाल कर सकते हैं।

अगर राहत न मिले तो क्या करें?

दोस्तों, अगर आपकी पाइल्स बहुत ही ज्यादा सीरियस है और आपको इन घरेलू रेमेडीज़ से या किसी भी ट्रीटमेंट से फायदा नहीं हो रहा है, या फिर आपकी पाइल्स बार-बार रिकरेंस करता रहता है—जैसे कि आप दवाई लेते हैं या कोई ट्रीटमेंट करते हैं, वो कुछ टाइम के लिए ठीक हो जाती है और फिर वापस आ जाती है—तो ऐसे में आपको एक खास और इफेक्टिव ट्रीटमेंट की जरूरत हो सकती है। यहाँ मैं आपको एक दावा के बारे में बताना चाहता हूँ, जिसका नाम है "Piles Support"। यह मेरा एक ट्रस्टेड एफिलिएट दावा है, जो खासतौर पर पाइल्स के मरीज़ों के लिए बनाया गया है।

Piles Support क्या है?
"Piles Support" एक आयुर्वेदिक फॉर्मूला है, जिसमें नेचुरल जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया गया है। यह दावा आपके पाइल्स के दर्द, सूजन, जलन और ब्लीडिंग को कम करने में मदद करता है। साथ ही, यह आपके डाइजेशन को बेहतर करता है और कॉन्स्टिपेशन की समस्या को जड़ से खत्म करने में सहायक है, जो कि पाइल्स का सबसे बड़ा कारण होता है। इसे रेगुलर यूज़ करने से न सिर्फ आपके पाइल्स के मास में कमी आती है, बल्कि यह रिकरेंस को भी रोकने में बहुत कारगर है।

अगर आप इन तीनों घरेलू उपायों—कैस्टर ऑयल, त्रिफला और सौंफ-हींग के फॉर्मूले—को आज़मा रहे हैं और फिर भी आपको पूरा आराम नहीं मिल रहा, तो मैं आपको सजेस्ट करूँगा कि "Piles Support" को एक बार ज़रूर ट्राई करें। इसे आप आसानी से ऑनलाइन ऑर्डर कर सकते हैं ये मेरी एफिलिएट दावा है और इसके इस्तेमाल से कई लोगों को बेहतरीन रिज़ल्ट्स मिले हैं। इस प्रोडक्ट को खरीदने का लिंक मैंने नीचे कमेंट बॉक्स में दिया है, आप चाहे तो वहाँ से डायरेक्टली इसे चेक कर सकते हैं।(डॉक्टर की राय ले)

यह दावा न सिर्फ नेचुरल है, बल्कि आपके लिए सर्जरी से बचने का एक आसान और सुरक्षित ऑप्शन भी हो सकता है। तो अगर आप पाइल्स से परेशान हैं और कुछ ऐसा चाहते हैं जो तेज़ी से काम करे, तो "Piles Support" आपके लिए एकदम सही हो सकता है।

अंतिम बात

तो दोस्तों, मुझे उम्मीद है की यह जबाब आपको जरूर पसंद आया होगी और इसमें बताए गए जो नुस्खे हैं—कैस्टर ऑयल, त्रिफला और सौंफ-हींग का फॉर्मूला—ये आपको जरूर पसंद आए होंगे। अगर इनको यूज़ करने के बाद भी आपको और बेहतर रिज़ल्ट चाहिए, तो "Piles Support" को ज़रूर आज़माएँ। इसके लिंक के लिए कमेंट बॉक्स चेक करें। इन ट्रीटमेंट्स से आपको जो रिझल्ट मिलेंगे, वो आप हमारे साथ ज़रूर शेयर करेंगे।

दोस्तों, अगर इस ट्रीटमेंट से रिलेटेड, या पाइल्स से रिलेटेड, या किसी भी और चीज़ से रिलेटेड आपका कोई सवाल है, या फिर कुछ ऐसे टॉपिक्स हैं, जिनके बारे में आप चाहते हैं कि मैं आपके लिए जबाब दू, तो कमेंट सेक्शन में हमसे अपने जो थॉट्स हैं, वह शेयर करना ना भूलिए।

तो चलिए, इसी के साथ मैं आपसे विदा लेता हूं इस वादे के साथ कि फिर मिलूंगा Quora पर एक नई बढ़िया जबाब के साथ। तब तक के लिए अपना बहुत ध्यान रखिए, हंसते रहिए, मुस्कुराते रहिए, रोज़ कुछ ना कुछ नया सीखते रहिए, ताकि आप रह सकें हेल्दी हमेशा

Monday, March 24, 2025

श्री कृष्ण से सीखें जीवन जीने की कला

वर्ष 1975 में में एक फिल्म आई थी 'संन्यासी'। इसमें मनोज कुमार, हेमामालिनी और प्रेमनाथ जैसे बड़े स्टार थे। इसका प्रसिद्ध गीत था-कर्म किये जा फल की चिंता मत कर रे इंसान, जैसे कर्म करेगा पैसा फल देगा भगवान, ऐ है गीता का ज्ञान। इस गीत ने हमारी पीढ़ी के स्कूल जाते बच्चों तक को गीता से पहला परिचय करा दिया था और भ्रमित भी कर दिया था कि बगैर फल की इच्छा किये काम करना कैसे संभव है?

इसका ठीक उलटा आजकल मोटीवेशनल स्पीकर बताते हैं। वे निरंतर जोर देते हैं कि लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तन-मन-धन लगा दो, सोते-जागते केवल लक्ष्य को ध्यान रखो, सकारात्मक विचार रखो कि मैं लक्ष्य को जरूर पाऊँगा, बार-बार प्रयास करो जब तक सफल न हो जाओ आदि। उनसे पूछा जाए कि यदि लक्ष्य प्राप्त न हो तो क्या करें तो उनका जवाब होता है कि दूसरा लक्ष्य बना लो लेकिन करना तो वही है जो यह पहले कह चुके हैं। हर स्थिति में लक्ष्य प्राप्ति की आदर्श स्थिति की कल्पना करना है और वास्तविक जीवन को उसके लिए झौंक देना है।

अगर मोटिवेशनल स्पीकर्स की बात मान भी ली जाए तो वास्तविकता यह है कि चाहा गया लक्ष्य या फल सभी को नहीं मिल सकता। भारत की सिविल सेवा परीक्षा। में लगभग 13 लाख अभ्यर्थी बैठते हैं। उनमें से लगभग 1000 अभ्यर्थी अंतिम रूप से चयनित होते हैं। अब अगर सभी 13 लाख इस परीक्षा की तैयारी में पूरा जीवन झाँक दें तब भी अंतिम सफलता तो 1000 को ही मिलेगी। शेष 12 लाख 99 हजार का क्या होगा ? यही स्थिति जीवन के हर क्षेत्र में है। अपने लिए सफलता का पैमाना हम स्वयं तैयार करते हैं। सफलता का पैमाना किसी के लिए सिविल सेवा में जाना हो सकता है तो किसी के लिए व्यापार का टर्न ओवर 10 लाख रुपये कर लेना हो सकता है। दूसरी ओर यदि किसी ने अपना लक्ष्य समाज सेवा करना बनाया है तो उसके लिए सिविल सेवा का कोई अर्थ नहीं। वहीं जिसने व्यापार का लक्ष्य अंबानी या अडानी की तरह हजारों करोड़ रुपयों का बनाया है उनके लिए 10 लाख रुपये की तो कोई गिनती ही नहीं है।

लोगों को सफलता के लिए प्रेरित करना बुरा नहीं है। संसार में बड़े-बड़े कार्य प्रेरणा से ही होते हैं। कंस वध का बदला लेने के लिए उसके श्वसुर मगध के राजा जरासंघ ने मथुरा पर 17 बार आक्रमण किया और कृष्ण से हर बार पराजित हुआ पर उसने हार नहीं मानी। फिर-फिर उत्साह से भरकर सेना इकट्ठी करता था और मथुरा पर आक्रमण करता था। 18वीं बार जरासंघ और कालयवन ने मिलकर आक्रमण किया और जब कृष्ण ने दो बड़ी विपत्तियों एक साथ देखीं तो युद्ध छोड दिया और भागकर द्वारका पहुँच गये। इस प्रकार रणछोड बनने के बाद द्वारकाधीश बन गये। इस कहानी से सामान्यतः दो निष्कर्ष निकाले जाते हैं पहला यह कि निरंतर प्रयास करना ही सफलता का मन्त्र है और दूसरा यह कि परिस्थिति के अनुसार पीछे हट जाने और फिर नई रणनीति पर काम करके सफलता प्राप्त की सकती है। परंतु बात इससे कहीं गहरी है। जरासंध ने मथुरा की विजय का लक्ष्य अपने मोटिवेशन से प्राप्त कर लिया परंतु क्या हम उसकी सफलता के लिए उसे अपना आदर्श बनाते हैं? नहीं, हम पूजा तो रणछोड़दास की ही करते हैं यह पूजा उनकी कूटनीति के लिए नहीं करते वरन् उस समग्र जीवन दर्शन के लिए करते हैं जो उन्होंने गीता में बताया। यह जीवन दर्शन है सफलता के लिए पूरी शक्ति से पुरुषार्थ करना ईश्वर के निमित्त बनकर कार्य करना और अंत में परिणाम को ईश्वर को समर्पित कर देना। श्रीकृष्ण कहते हैं कि सफलता असफलता, सुख-दुःख हो संसार के नियम से आते ही रहेंगे। ससार को सदैव अपने अनुकूल नहीं किया जा सकता इसलिए संसार के तमाम झंझावातों के बीच, सिद्धि-असिद्धि, सुख-दुःख के बीच शांति और समत्व में जीवन जीना ही गीता प्रमुख की शिक्षा है।

गीता, जीवन का सबसे महत्वपूर्ण रहस्य - कर्म का रहस्य खोलकर रख देती है। श्रीकृष्ण ने अपने जीवन में इसे जीकर दिखा दिया है। गीता कहती है कि हम किसी भी क्षण कर्म किये बगैर नहीं रह सकते (3.5) हम कर्म कर सकते हैं परंतु उसका परिणाम क्या होगा यह हमारे हाथ में नहीं है. अतः न तो केवल परिणाम के लिए ही कार्य करना है और न ही हमें अकर्मण्य भी होना है (2.47)। एक खिलाड़ी ओलम्पिक के लिए वर्षों मेहनत करता है। पर उसे पदक मिलेगा या नहीं यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसके प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों ने कितनी तैयारी की है। अचानक कोई दुर्घटना हो जाना, कोई बुरी खबर से मानसिक शांति भंग हो जाना, अस्वस्थ हो जाना आदि अनेक कारण हो सकते हैं जो खिलाड़ी के नियंत्रण से बाहर हैं। प्रतियोगी परीक्षा में आने वाले प्रश्न, उत्तर पुस्तिका जाँचने वाले का दृष्टिकोण और मनोदशा आदि ऐसे कारण है जो परीक्षार्थी के नियंत्रण के बाहर हैं। इन कारणों के समग्र प्रभाव को ही भाग्य कहते हैं। गीता में कहा गया कि कार्य की सफलता में भाग्य का योगदान 20 प्रतिशत है (18.14)। गीता हमें जीवन की वास्तविकता बताती है कि फल तो कर्म के नियम से मिलेगा परंतु यह क्या होगा यह हम निश्चित नहीं कर सकते क्योंकि वह अनेक कारकों से निर्धारित होता है और इनमें से कई कारक हमारे नियंत्रण के बाहर हैं। गीता यह भी कहती है कि जीवन में सुख-दुःख तो आएँगे ही इसलिए उन्हें सहन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है (2.14)।

सामान्य रूप से हम कर्म करते समय तनाव, थकान, भय से ग्रस्त होते हैं। इसलिए कर्म से भागकर अवकाश चाहते हैं। इतवार की सुबह खुश होते हैं और सोमवार की सुबह उदास हो जाते हैं। गीता बताती है कि कैसे तीव्र कर्म करते हुए आंतरिक शांति और आनन्द बनाए रखें और कैसे बगैर तनाव, धकान या भय के तीव्र कर्म कर सकर तब अवकाश का भी आनन्द लिया जाता है परंतु वह कर्म के आनन्द से अवकाश के आनन्द की यात्रा होती है न कि कर्म के दुःख से अवकाश के सुख की। तब सफलता और असफलता दोनों के बीच जीवन यात्रा आनन्द और शांति से चलती रहती है। 
श्रीकृष्ण का युद्ध भूमि में रथ पर खड़े होकर उपदेश देता चित्र हमें गीता का मूल तत्त्व स्पष्ट कर देता है। श्रीकृष्ण रथ पर खड़े हैं उनके पीछे अर्जुन निराश बैठे हैं। श्रीकृष्ण के हाथ में घोड़ों की लगाम खिची है, अचानक रोक दिये जाने से घोड़ों के अगले पैर ऊपर उठ गये हैं व मुख कुछ खुल गये हैं। इससे भगवान् की महान कर्मशीलता और परिस्थितियों पर पूर्ण नियंत्रण स्पष्ट होता है। वह युद्ध के तनाव से निर्लिप्त हैं, उनके मुख पर स्मित मुस्कान है. शांति है, सहानुभूति है। वे अर्जुन की ओर मुड़कर उसे उपदेश दे रहे हैं। यही आदर्श जीवन है कर्म में कुशलता, अपने पुरुषार्थ से परिस्थिति पर पूरा नियंत्रण, आतरिक शांति, दूसरों के प्रति सहानुभूति और इसके बाद भी परिणाम को लेकर निर्लिप्तता।

गीता कर्म की प्रेरणा देती है, सफलता के लिए पुरुषार्थ को पहला कदम बताती है। यहाँ तक पह मोटिवेट करती है। परंतु इच्छित फल प्राप्त न होने पर, जीवन के अनिवार्य सुख और दुख में शांत, अनुद्विग्न और स्थिर रहना सिखाती है। जीवन में कोई एक ही लक्ष्य सफलता या असफलता निर्धारित नहीं करता है। जीवन रोज नई चुनौतियों देता है। गीता इन चुनौतियों के बीच जीवन जीने की कला रवाती है यही यह सबसे अलग हो जाती है। गीता, मोटिवेशनल किताबों की तरह केवल 0.1 प्रतिशत तथाकथित सफल लोगों के लिए नहीं है वह तो सारी मानवता का मार्गदर्शन करती है. उन्हें जीवन जीना सिखाती है। इसलिए जरासंध हमें मोटिवेशन दे सकता है पर जीवन जीने का तरीका तो श्री कृष्ण ही सिखा सकते हैं।

प्राचीन औषधियाँ

बच्चेदानी में सिस्ट (गांठे) मल्टीपल सिस्ट चॉकलेट सिस्ट मंग्स की सिस्ट चर्बी की सिस्ट चाहे बच्चेदानी में कैंसर की गांठे क्यूँ ना हो किसी भी प्रकार की गांठ को गला कर बाहर कर देती है ये दो चीजें। इसका इस्तेमाल का तरीका :-

1.दारू हल्दी 100 ग्राम

2.सुगंध बाला 100 ग्राम

ये दोनों जड़ी को बारीक़ पाउडर बनाकर 500mg कैप्सूल के खली में डाल कर कैप्सूल बनाकर रख दें सुबह दोपहर शाम एक-एक कैप्सूल खाने से आधा घंटे पहले रोजाना पानी के साथ इस्तेमाल करें एक से दो महीने करने पर बच्चेदानी की गांठ की समस्या समाप्त हो जाती है।