Tuesday, March 22, 2022

बेहतरीन देशी नुस्खा

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क्या आप कोई ऐसा बेहतरीन देशी नुस्खा बता सकते हैं, जिसको इस्तेमाल कर के हम बहुत सी शारीरिक बीमारियों से छुटकारा पा सकें?

आज मैं आपको एक ऐसा जादुई देसी नुस्खा बताने जा रहा हूं, जो आपके शरीर में बहुत ही अधिक लाभ करेगा। यह बहुत ही सस्ता और आसान है। मैंने इसे असंख्य लोगों को बताया है।

आप सबसे पहले एक बड़ा बर्तन ले लीजिए। अब इसमें 400- 500 ग्राम के लगभग नीम की पत्तियां ( टहनियों समेत ) डाल लीजिए और 500 ग्राम साधारण चने डाल लीजिए। अब इस बर्तन में इतना पानी डाल लीजिए कि ये सभी पत्तियां और चने डूब जाएं। अब बर्तन को ढक कर पूरे 1 घंटे तक इन सभी चीजों को उबाल लीजिए। ठीक एक घंटे के बाद बर्तन को उतारकर ठंडा होने के लिए रख दीजिए। अब इसमें से उबले हुए चने को अलग निकाल लीजिए और बाकी चीजों को फेंक दीजिए। अब आप इन चनों को सुखा लीजिए। यहां एक बात का ध्यान रखिए कि यदि आप इन चनों को छाया में सुखाएंगे तो यह सबसे अधिक असरदार सिद्ध होंगे। अभी ठंड का मौसम है तो आप इन्हें थोड़ा धूप में भी सुखा सकते हैं। इनके सूखने के बाद आप इन्हें पीस लीजिए और इन्हें पीसते समय इनमें 40 से 50 ग्राम सौंठ का पाउडर ( सूखी हुई अदरक ) जरूर मिला लीजिए। यदि आप गर्मियों के मौसम में इस नुस्खे को तैयार करें तो सौंठ के पाउडर की मात्रा आधी कर लीजिए। बस अब आपकी देसी दवाई तैयार हो गई है।

फोटो स्त्रोत: मेरे फोन की गैलरी*

लेने का तरीका - आप सुबह सवेरे उठकर और अच्छी तरह से कुल्ला करके एक छोटी चम्मच पाउडर अपने मुंह में रख लीजिए और गुनगुने पानी के साथ ले लीजिए। इस पाउडर का स्वाद कड़वा होगा क्योंकि नीम का सारा कस धीरे-धीरे करके चने में आ चुका होता है।

लाभ - इस दवाई का सबसे बड़ा और पहला लाभ यह है कि यदि आपकी त्वचा पर या आपके खून में कोई एलर्जी है तो वह धीरे-धीरे बिल्कुल समाप्त हो जाएगी। आपका पेट बहुत अच्छी तरह से साफ होना शुरू हो जाएगा। पेट में अफारा (पेट फूलना) की समस्या से बहुत राहत मिलेगी। आपको अपने शरीर के अंदर एक अलग ही जोश और ऊर्जा महसूस होगी। वीर्य शक्ति में बहुत वृद्धि होगी। शुगर को नियंत्रित रखने में भी यह नुस्खा बहुत फायदेमंद है। गले में खराश वगैरह की कुछ दिक्कत रहती है तो वह भी ठीक हो जाएगी। सीधी सी बात है कि यदि हमारा खून और पेट साफ होगा, तो हमारी अधिकतर समस्याएं ठीक हो जाएंगी।

परहेज - सुबह दवाई लेने के 40 - 50 मिनट तक कुछ नहीं खाए पिए।

तली भुनी चीजों पर नियंत्रण रखें।

दो - चार दिन में ही लाभ की उम्मीद न करें। लगभग एक महीने बाद वास्तविक लाभ दिखना शुरू होगा। आप चाहे तो नियमित रूप से भी इस दवा का सेवन कर सकते हैं। स्वस्थ व्यक्ति भी इस दवा का सेवन कर सकते हैं। कोई भी दुविधा हो तो पूछ लें। जो भी इस दवा का सेवन करें तो लाभ होने के बाद टिप्पणी में जरूर बताएं।

आपको लाभ होने पर, मुझे यह नुस्खा बताने वाले स्वर्गीय श्री रघबीर सिंह हलुवासिया जी की दिव्य आत्मा को नमन जरूर करें।

Monday, March 14, 2022

शिलाजीत से ज्यादा शक्तिशाली आयुर्वेदिक औषधियां

 

शिलाजीत से ज्यादा शक्तिशाली आयुर्वेदिक औषधियां कौन-कौन सी हैं?

यकीनन शिलाजीत में आयुर्वेदिक रसशास्त्र के सभी गुण मौजूद हैं लेकिन रसों का राजा पारद है जिसे रसेन्द्र कहा जाता है और आदि वैद्यराज गुरु के समान माना जाता है। जब कोई औषधि काम न करे तो पारद मरणासन्न रोगी को मृत्यु से छीन कर पुनः तरुण समान कर देता है ऐसा शास्त्रोक्त है।

पारे को आदि शिव का अंश माना जाता है। यहां तक ज्योतिष शास्त्र में पारद शिवलिंग के दर्शन और पूजन से किस्मत बदलने का दावा किया जाता है। इससे कोई भी पारद की औषधीय महिमा का सहज अंदाज़ा लगा सकता है। लेकिन पारा विष है और औषधीय गुणों की प्राप्ति के लिए इसे मारण और शोधन की अवश्यकता होती है जो कि शास्त्रानुसार बहुत कठिन है। अफसोस और दुर्भाग्य है कि सुविधा की तलाश में हमने पारे के शोधन की पांच में से चार विधियां खो दीं। हम अपनी प्राचीन दुर्लभ अद्वितीय विरासत को बचा भी नहीं पाए।

खैर रसराज रसेन्द्र अथवा पारद के बाद रसशास्त्र में रसों का वर्गीकरण किया गया है जिसे मैं यहां कहता हूं।

  1. आठ महारस: इसमें अभ्रक सर्वश्रेष्ठ है और महारासों में इष्ट है। इसे शक्ति स्वरूपा देवी पार्वती का अंश माना जाता है। पारद को मारण, शोधन और धारण करने की शक्ति अभ्रक में ही निहित है। महारसों में शिलाजीत को पांचवें स्थान पर रखा गया है।
  2. आठ उपरस - इस वर्ग का राजा गन्धक है और उपरसों में सर्वश्रेष्ठ है। कहा जाता हैं कि समुद्र मंथन में निकले अमृत कलश के साथ चिपका हुआ निकला था जिसे देव और असुरों ने मानवजाति के कल्याण हेतु पृथ्वी पर भेज दिया
  3. साधारण रस वर्ग में आठ औषधीय द्रव्यों कम्पिल्लकगौरीपाषाण अर्थात आर्सेनिक, नौसादरकपर्द अर्थात कौड़ी, अग्निजार (एम्बरग्रीस), गिरिसिन्दूरहिंगुल (सिनाबर) और मृददारश्रृंग (सफेदा) को रखा गया है। इसमें कम्पिल्लक अर्थात कमीला सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है।
  4. धातुओं में स्वर्ण धातु को, रत्नों में माणिक्य को, उपरत्नों में वैक्रान्त को, विषों में सर्पविष और उपविषों में धतूरा को सर्वोत्तम माना गया है।

अब आप स्वयं अपने विवेक से शिलाजीत की सर्वश्रेष्ठता का अंदाजा लगा सकते हैं। लेकिन उससे पहले मैं यहां तीन महत्वपूर्ण बातें जरूर कहना चाहूगा:

  • शरीर को निरोग और सुदृढ़ बनाने के लिए शिलाजीत सर्वोत्तम रसायन है।
    • रसोपरस-सूतेन्द्र रत्न-लोहेषु ये गुणाः। वसन्ति ते‌ शिलाधातौ जरा-मृत्यु-जिगीषया॥
      • अर्थात अभ्रक आदि महारस, गंधक आदि उपरस, पारद, माणिक्य आदि रत्न सुवर्ण आदि धातुओं में जरा (बुढ़ापा), मृत्यु रोग समुदाय को जीतने के जो गुण हैं वे सब शिलाजीत में भी हैं!
  • अश्वगंधा, सतावरी, ब्राह्मी, गिलोय, तुलसी, आदि आदि औषधियां महान और दिव्य है, प्रकृति का वरदान हैं लेकिन शिलाजीत से इनकी तुलना निरर्थक और सूरज को दिया दिखाने के समान है।
  • रसशास्त्र में ज्यादातर रसायन/औषधियां प्राकृतिक रूप से विषाक्त होती हैं इसलिए इनका शोधन बहुत जरूरी होता है अन्यथा ये जीवनदायी औषधियां जीवन छीन लेने में जरा भी चूक नहीं करती। इसलिए इनके सेवन के लिए चिकित्सकीय परामर्श जरूरी है

इति!

©Ashwani Kumar @प्राचीन आयुर्वेद

निरोगी जीवन की शुभकामनाओं के साथ, जाने से पहले मैं प्रश्न पूछने के लिए आभार व्यक्त करता हूं और धैर्य पूर्वक उत्तर को अंत तक पढ़ने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद कहता हूं! 🙏

मैं एक छोटा सा फेवर माँगना चाहता हूँ कि आपको मेरा लेख पसंद आया है तो इसे अपने दोस्तों के साथ और संबंधित मंचों पर साझा करें ताकि औरों को भी लाभ हो सके; दूसरों की मदद करें!

आपकी हर प्रतिक्रिया मुझे उस तरह के लेख लिखने के लिए प्रोत्साहित करेगी जो आपको अच्छे तर्कों के साथ यथेष्ठ जानकारी वाले बेहतर परिणाम प्राप्त करने में मदद करते हैं।

अगर आपने इस लेख को पसंद किया है, तो कृपया मुझे कॉमेंट में बताएं...अगर नहीं भी पसंद किया है तो भी कॉमेंट में बताएं। अगर आपके पास कोई प्रश्न है? मुझे अपने विचार नीचे टिप्पणियों में सुनने दें!

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Sunday, February 27, 2022

कब्ज का घरेलू उपाय

 

कब्ज क्यों होती है, कब्ज का घरेलू उपाय क्या है?

कब्ज कोई बीमारी नहीं है। यह हमारी निष्क्रिय जीवनशैली का एक नमूना है। जो धीरे-धीरे हमारे शरीर में दीमक की तरह घुस जाती है और शरीर को जकड़ लेती है। फिर उससे छुटकारा पाना बहुत मुश्किल होता है।

उसके लिए हम आधुनिक चिकित्सक के पास जाते है। वह हमें तत्काल प्रभाव वाली दवाइयां प्रदान करता है। जिन्हें खाने से तुरंत राहत तो मिल जाती है लेकिन, समस्या ज्यों की त्यों बनी रहती है, और जटिल बनती चली जाती है।

आलस्य, रात का खाना खाते ही सो जाना, पानी कम पीना, खाना खाने के आधे घंटे बाद पानी पीना भूल जाना, खाना खाते ही अधिक पानी पीना, व्यायाम की कमी, शारीरिक क्रियाकलापों की कमी, चिंता, अवसाद, दवाइयों का अधिक सेवन, ड्रग्स, नशीली दवाओं का सेवन, नशा… इत्यादि। कब्ज होने के मुख्य कारण है।

यह हमारे शरीर को दीमक की तरह धीरे-धीरे कमजोर बनाते है और सीधे हमारी आंत और पेट पर आघात करते है। जिससे आंते कमजोर हो जाते है। जो मल निष्कासन की क्षमता को कम कर देती है। धीरे-धीरे मल आंतों में सड़ने लगता है और टाइट होने लगता है। जिसको निकालने में आंते अक्षम हो जाती है, और कभी पेट साफ हो जाता है कभी नहीं होता।

जब बहुत ज्यादा समस्या होती है तो, हम मल निष्कासन करने के लिए चूरन व दवाओं का इस्तेमाल करते है जो आंतो के साथ जबरदस्ती कर मल त्याग करवाती है। जो बहुत ही खतरनाक साबित हो सकता है। निरंतर इन दवाओं का सेवन करने से आंते और कमजोर हो जाती है। जो अल्सर और कैंसर का कारण बनता है।

अधिक दिनों तक आंतों में मल सड़ने से गैस बनती है। जो ह्रदय घात का एक मुख्य कारण है।

कब्ज के निवारण की बात करें तो आपको ऊपर लिखित सभी नियमों को ईमानदारी से पालन करना होगा। चिंता, अवसाद, नशा मुक्त रहना होगा। अपने दैनिक जीवन में व्यायाम को अपनाना होगा किसी भी तरीके के शारीरिक क्रियाकलाप बहुत जरूरी है।

एक बात ध्यान रखें कब्ज की समस्या एक दो महीने में नहीं बनती है।इसको बनने में सालों लगते है तो, सही होने में भी कुछ महीनों का वक्त अवश्य लगेगा इसमें जल्दबाजी या उत्तेजना ना दिखाएं।

इसके लिए आपको प्राकृतिक चिकित्सा और योग पद्धति के कुछ अभ्यास अपनाने चाहिए। इससे आपकी यह समस्या जड़ से खत्म होकर आपके शरीर को एक नया आयाम देगी। कुछ छोटे-छोटे अभ्यास जिनको कोई भी कर सकता है…

  1. सुबह उठते ही पेट भर गुनगुना पानी पिए, उसके बाद 1 से 3 मिनट ताड़ासन का अभ्यास करें और ताड़ासन में चलने की कोशिश करें। ऐसा करने से कुछ देर बाद आपको बहुत अच्छे वाला प्रेशर बनेगा। अगर आप की कब्ज की समस्या बहुत पुरानी है तो हो सकता है एक-दो दिन में प्रेशर ना बने, परंतु अभ्यास जारी रखें कुछ दिन बाद प्रेशर अवश्य बनने लगेगा।
  2. खाना खाते समय, खाने के बाद पानी ना पिए आवश्यकतानुसार एक या दो घूंट पानी पी सकते है। खाना खाने के आधे घंटे से 45 मिनट के अंतराल में पानी अवश्य पिए है।
  3. सुबह सूर्य उदय से पहले उठे, सूर्य उदय के बाद सोते रहने से पेट में एसिड बनने लगता है जो, कब्ज का मुख्य कारण है।
  4. सुबह किसी भी प्रकार की शारीरिक क्रिया अवश्य करें कुछ नहीं कर सकते तो कुछ दूरी तक पैदल चले।
  5. रात्रि का भोजन किसी भी हाल में सोने से 2 घंटे पहले कर ले और हो सके तो सुपाच्य और हल्का खाना खाएं।
  6. योगासनों में ताड़ासन, भुजंगासन, पश्चिमोत्तानासन, उत्तानपादासन, हलासन, अर्ध हलासन, मत्स्येंद्रासन… का अभ्यास कर सकते है। प्राणायाम में कपालभाति भस्त्रिका नाड़ी शोधन प्राणायाम महत्वपूर्ण है…

कब्ज की समस्या का निदान के लिए प्राकृतिक और योगाभ्यास को अपनाएं। दवाइयों से बचे। दवाइयों के चक्कर में जितना पड़ेंगे उतना उलझते चले जाएंगे।

#kailashbabuyoga

Wednesday, February 23, 2022

Indian Ayurveda Knowledge

 You can save several Lakhs medical expenses only by gaining some  Knowledge of  Indian Ayurveda. 


Reference book & (Free Consultation)

 A MANUAL for Healthy Life & Healthy INDIA by Prof.  R. K. Aggarwal (in Hindi only)

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Mob: 9997934668, 9416570828

Treatment of Impotency (नपुंसकता का प्रभावी उपचार)

मर्दाना ताकत पाने तथा हस्थमैथुन से हुए नुकसान का उपचार कैसे करें?

हस्तमैथुन या किसी भी कारण से मर्दाना कमज़ोरी का उपचार करना चाहते हैं तो आपको इन सब बातों पर ध्यान देना होगा :

आपके पास सिर्फ़ और सिर्फ़ एक ही शरीर है और आख़िरी सांस तक इसी शरीर से ही सब कुछ करना है तो इसलिए सबसे पहले अपने शरीर को बर्बाद करना बंद करें, अगर आप इतना भी कर लेते हैं तो यह आपके शरीर पर एक बहुत बड़ा अहसान होगा

जो बीत चुका है उसको याद ना करें, उसको भुला कर एक नयी शुरुआत करे और दिमाग़ से नाकरात्मक विचारों को निकाल दें
खुद को शारीरिक तौर पर व्यस्त रखें और शरीर से पसीना बहाने की आदत डालें
अपने हाथों से अपनी शारीरिक उर्जा को ख़त्म करना बंद कर दें
अगर आप किसी भी नशा करने के शौकीन है तो नशा करना भी बंद कर दें
अगर ज़्यादा कमज़ोरी नही है तो आप 02 ग्राम सफेद मूसली और 02 ग्राम इलायची का पाउडर एक गिलास दूध में उबालकर सुबह और शाम को नाश्ते और खाने के एक घंटे बाद लें
आप भूलकर भी अँग्रेज़ी और बाजारू दवा ना लें क्योंकि ऐसा करने से आपके शरीर को ज़्यादा नुकसान होगा

अगर आपको ज़्यादा कमज़ोरी है तो आप यह दवा ले सकते हैं और आप इस दवा को खुद घर में ही बना सकते हैं :

शोधित शिलाजीत - 50 ग्राम
सालम पंजा - 30 ग्राम
कौन्च बीज - 20 ग्राम
शतावरी - 05 ग्राम
केसर - 02 ग्राम
बबूल - 20 ग्राम
ब्रहमी - 08 ग्राम
मुलहठी - 20 ग्राम
अरकरा - 10 ग्राम
तुलसी बीज - 15 ग्राम

शिलाजीत को छोड़कर बाकी सभी सामग्रियों को मिक्सर में पीस लें और शिलाजीत को कूट कर नरम कर लें और पानी की बूँदों का उपयोग करते हुये 180 गोलियाँ बना लें.

यह आपका 45 दिन का कोर्स तैयार हो गया है, सुबह और शाम को खाना खाने के एक घंटे बाद गुनगुने दूध के साथ 02 - 02 गोलियाँ लें.

with Thanks by

Dr. C.M. Garg (Amulya Aarogya)

Monday, February 21, 2022

खासी की देसी दवा

 

खासी की देसी दवा क्या है?

मेरे एक शिष्य को लगभग 15 साल पहले इन्हीं दिनों में बलगम वाली खांसी हुई थी। उसे मैंने एक चम्मच आंवला चूर्ण और मुलेठी चूर्ण (दोनों बराबर मात्रा में )दिन में तीन बार गुनगुने पानी से लेने के लिए कहा। एक सप्ताह में वह पूरी तरह से ठीक था। दवा डेढ़ चम्मच तक प्रति खुराक ली जा सकती है।

दूसरी दवा उस प्रकार की खांसी के लिए दी गई थी जिसमें एक युवक खांसते खांसते अधमरा सा हो जाता था और शरीर नीला सा होने लगता था। वह आश्रम के निकट गाँव में ही रहता है। उसके बुजुर्गो ने बीमारी शुरू होने के 6 माह बाद मुझसे उस दिन सम्पर्क किया था जब वह युवक गंभीर हालत में लखनऊ मेडिकल कालेज में भर्ती करा दिया गया था। शाम को डॉक्टरों ने जवाब दे दिया, बचेगा नहीं, ले जाओ। अस्पताल से सीधे मेरे पास ले आए। खांसी के कारण वह सो भी नहीं पाता था। मैंने दवा बताई —दो चाय वाली चम्मच गाय का घी एक कटोरी में डाल कर चूल्हे पर गर्म होने के लिए रख दो। खूब गर्म होने पर बीस ग्राम काली मिर्च घी में डाल दो। भुनने पर मिर्च ऊपर तेरने लगेंगी। अब इसमें दो चम्मच खांड या मिश्री का चूर्ण मिला कर आग से उतार कर हल्का गर्म रहने पर मरीज को खिलादो।

दवा खाने के दो तीन घंटे बाद वह लड़का सोया। सुबह उसे दूसरी खुराक दी गईं। बस, लड़का स्वस्थ है, नौकरी करता है।

with thanks

Swamiramanuj Acharya

Wednesday, February 2, 2022

Great Indian Nari

 

आईएएस स्मिता सभरवाल में क्या खास है?

22 साल की उम्र में IAS अफसर बनी फौजी की बेटी, हटके हैं इनके काम करने का अंदाज

19 जून 1977 को जन्मी स्मिता पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग की रहने वाली हैं। उनके पिता रिटायर सेना अधिकारी कर्नल प्रणब दास हैं। उनकी मां का नाम पुरबी दास है। पिता के आर्मी में रहने की वजह से स्मिता अलग-अलग शहरों में पली-बढ़ी हैं। पिता के रिटायरमेंट के बाद सभी हैदराबाद में सेटल हो गए। वहीं, स्मिता की स्कूलिंग हुई। 12 वीं में स्मिता ISC टॉपर रहीं। इसके बाद कॉमर्स स्ट्रीम से उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है।

स्मिता के माता-पिता ने आईसीएसई स्टैंडर्ड को टॉप करने के बाद अपनी बेटी को सिविल सर्विस में जाने के लिए प्रोत्साहित किया। स्मिता ने जब सिविल सेवा की पढ़ाई शुरू की तो पहली बार में उन्हें असफलता हाथ लगी और वो प्रीलिम्स भी नहीं क्लियर कर पाई थीं। पर उन्होंने हार नहीं मानी और फिर से कड़ी मेहनत के साथ कोशिश की।

और वो दिन भी आया जब वो यूपीएससी का पेपर पास करने वाली सबसे कम उम्र की स्टूडेंट बनीं। साल 2000 में अपने दूसरे प्रयास में, उन्होंने न केवल परीक्षा पास की बल्कि उन्होंने ऑल इंडिया 4th रैंक हासिल की। यूपीएसससी में टॉप करके मां-बाप का नाम रोशन किया।

स्मिता ने पहले तेलंगाना कैडर के आईएएस की ट्रेनिंग ली और नियुक्ति के बाद वह चितूर में सब-कलेक्टर रहीं। वो कडप्पा रूरल डेवलपमेंट एजेंसी की प्रोजेक्ट डायरेक्टर,वारंगल की नगर निगम कमिश्नर और कुरनूल की संयुक्त कलेक्टर रही हैं।

अबतक के करियर में स्मिता की तैनाती तेलंगाना के वारंगल, विशाखापट्टनम, करीमनगर और चित्तूर में हुई है। स्मिता जहां-जहां काम गईं लोग आज भी उन्हें याद रखते हैं और उनकी छवि जनता की अधिकारी वाली बन गई है।

बता दें कि स्मिता ने अपने कार्यकाल के दौरान कई बड़ी-बड़ी जिम्मेदारियां संभालीं हैं जिसके लिए लोगों ने उन्हें काफी सराहा जाता है। उन्हें तेलंगाना राज्य में किए गए कई सारे सुधारों के लिए जाना जाता है। उन्होंने तेलंगाना के लोगों की कई तरह से मदद की और जनता पर केंद्रित कई सारी योजनाओं को पूरा किया।

स्मिता ने आईपीएस ऑफिसर डॉक्‍टर अकुन सबरवाल से शादी की है, उनके दो बच्‍चे नानक और भुविश हैं। सोशल मीडिया पर स्मिता सबरमाल काफी चर्चा में रहती हैं। उनके काम करने के अंदाज और गरीबों की मदद के जुनून को सराहा जाता है।

Sunday, January 16, 2022

अग्रवाल समाज

 

अग्रवाल समाज के लोग बनिया कैसे हो गए जबकि उनके कुल प्रवर्तक अग्रसेन जी क्षत्रिय समाज के थे?

किदवंती है कि अग्रसेन जी क्षत्रिय थे जिनके संतान नही हुई थी तब ऋषियों ने उनसे यज्ञ करवाया । यज्ञ में बलि के विरोध करने और ऋषियों ने कहा कि आप वर्ण बदल लें तो उन्होंने वैश्य बनना स्वीकार किया लेकिन साथ ही कहा कि में क्षत्रियों के उपयोग में आने वाले चंवर ओर छत्र नही छोडूंगा।

इस प्रकार अग्रसेन ने वैश्य वर्ण अपना लिया। ऋषियों के यज्ञ के प्रभाव से उनके 18 संतान हुई जिनके नाम से 18 गोत्र कहलाते है। उन्होंने वैश्य लोगों के साथ ही नया नगर अग्रोहा बसाया।

यज्ञ में शामिल 18 ऋषि

अग्रवालों में 18 गोत्र

अभी भी आप किसी अग्रवाल की बरात देखोगें तो दूल्हा के ऊपर छत्र यानी छतरी ताने हुए एक व्यक्ति रहता है और एक व्यक्ति चंवर हिलाता हुआ होता है। हालांकि अब चंवर मिलने बन्द होने का कारण 

With thanks by Shri Om Prakash Gupta