Monday, January 16, 2017

लघनं परम औषधम््


         
          दीर्घायु व निरोग जीवन के लिये व्यक्ति औषधियाॅं ढूंढता रहता है। इससे अधिक महत्वपूर्ण है स्वस्थ रहने के विषय में आवश्यक जानकारी का सही रूप में उपलब्ध होना व उसका जीवन में पालन ंका सतत प्रयास करना। महर्षि चरक ने स्वस्थ जीवन के लिए दो बातों पर बहुत जोर दिया है। वह हैं- उपवास व ब्रह्मचर्य। आज की व्यस्त जीवन शैली में व्यक्ति चाहकर भी बहुत नियमित खान पान नहीं कर पाता है, जिसके दुष्प्रभाव स्वास्थ्य पर ना पड़े इस हेतु उपवास का अत्याधिक महत्व है।
          उपवास की बात हम जैसे ही करते हैं व्यक्ति के मन में यह भय उत्पन्न होने लगता है कि कहीं लम्बे समय तक भूखें न रहना पड़े। आज स्थिति तों इतनी भयावह हो चुकी है कि यदि जागने के बाद चाय न पी लें तों सिर दर्द या अन्य दिक्कतें महसूस होना शुरू कर देती हैं। ऐसे में व्यक्ति भूखें कैसे रह सकता है। फिर आज के संदर्भ में व्रत व उपवास की क्या प्रासंगिकता रह जाती है। इस विषय को यदि सही में समझा जाये तों यह बहुत ही महत्वपूर्ण है । सप्ताह, दस अथवा पन्द्रह दिन में एक दिन जैसे रविवार, वीरवार अथवा एकादशी का चयन किया जाए उसको स्वस्थ दिवस के रूप में सोचा जाए। स्वास्थ्य के लिये हमारे लिये क्या उपयोगी हैं व क्या अुनपयोगी यह सब विश्लेषण किया जाए। जैसे यदि हम चाय दिन में चार बार पीते हैं तों उपवास के दिन दो बार पीएं। शाम को सोचें कि क्या हम एक माह में दो बार चाय पीकर रह सकते हैं। यदि हम लाल मिर्च व नमक अधिक खा रहे हैं तों व्रत वाले दिन हल्का सेंधा नमक व बिना मिर्च के भोजन करें। इस प्रकार के अनेक प्रकार के अच्छे संकल्प व्रत वाले दिन व्यक्ति के अन्दर उठने चाहिएं जो उसके स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद हैं।
          जैसे-जैसे व्यक्ति का शरीर शुद्ध होता जाए उसकी पौष्टिकता बढ़ती जाए अथवा धातुएॅं मजबूत होती जाएॅं तब वह उपवास के सही व प्राचीन स्वरूप को अपना सकता है जिसमें दोपहर 12 बजे तक मात्र नींबू पानी के अलावा कुछ न लिया जाए तथा एक समय हल्का सूपाचय भोजन लिया जाए व दूसरे समय दूध अथवा फलाहार पर रहा जाए।
उपवास के मुख्य उद्देश्य हैंः-
1.      शरीर को ज्वगपदे से रहित किया जाए।
2.      स्पअमत को विश्राम दिया जाए।
3.      चर्बी व कोलेस्ट्रोल के स्तर को कम किया जाए।
4.      रक्त को शुद्ध किया जाए।
5.      अनवाश्यक विषो का निराकरण किया जाए।

          उपवास में यदि कठिनाई आती है तों खाना न छोड़ें केवल खाद्य पदार्थों को बदलें। कच्चा मूली, गाजर, सलाद, फलों का अधिक सेवन इस दिन करें। विभिन्न रसों का सेवन भी लाभप्रद है परन्तु बाजार से लाए गये किसी रस का सेवन ना किया जाए, क्योंकि इसमें च्तमेमतअंजपअमे सोडियम बेजाएंट मिले होते हैं। खाद्य गुणवता के विषय भारत में कड़े न होने के कारण अनेक कम्पनियाॅं अपने लाभ के लिये अधिक समय तक सड़ने से बचाने के लिए आवश्यकता से अधिक च्तमेमतअंजपअमे मिलाते हैं। इसलिए जो स्वस्थ रहना चाहते हैं उन्हें बाजारी खाद्य पदार्थों पर अपनी निर्भरता कम करनी चाहिए।

1 comment: