Friday, October 30, 2020

मूली के पत्तों में पोषक तत्त्व

 

मूली के पत्तों को स्वास्थ्य के लिए इतना लाभकारी क्यों माना जाता है?

बहुत से लोग मूली के पत्तों को तोड़कर बाहर फेंक देते हैं। मूली के पत्तों में बहुत पोषक तत्त्व पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभकारी माने गए हैं। आओ जानते हैं:-

1- अगर आप मूली के पत्तों का सेवन करते हैं तो आपको आयरन, कैल्शियम, फोलिक एसिड, विटामिन सी और फॉस्फोरस आदि प्राप्त होता है। यह पोषक तत्त्व स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभकारी हैं।

2- मूली के पत्तों में सोडियम होता है, जो शरीर में नमक की कमी को पूरा करता है। लो ब्लडप्रेशर के मरीजों के लिए भी यह बेहद लाभकारी है। इसके अलावा इसमें मौजूद एंथेकाइनिन दिल के लिए फायदेमंद होता है।

3- मूली के पत्तों में अधिक डायटरी फाइबर पाए जाते हैं, जिससे व्यक्ति का पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है। यह मूली के पत्ते कब्ज और पेट फूलने जैसी समस्याओं से छुटकारा दिलाते हैं।

4- मूली के पत्तों में आयरन और फास्फोरस की मात्रा काफी होती है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक हैं। इसकेे अलावा इसमें विटामिन सी, विटामिन ए और थायमिन जैसे पोषक तत्व थकान को दूर करने में मददगार होते हैं।

5- बवासीर जैसी कष्टकारी बीमारी को दूर करने के लिए मूली के पत्ते लाभदायक है। इसमें एंटी−बैक्टीरियल प्रॉपर्टीज होती है, जो सूजन व दर्द को कम करती है।

6- मूली पत्‍तों को चबा-चबाकर खाने से दांतों और मसूड़ों की बीमारियां दूर होती हैं।

7- मोटापे से छुटकारा पाने के लिए मूली के पत्तों के रस में नींबू और नमक मिलाकर पीने से लाभ मिलता है।

8- पीलिया के इलाज में भी मूली के पत्ते लाभदायक है। इसके इलाज के लिए पत्तियों का मिक्सी की मदद से रस निकाले और छानकर, एक गिलास रोजाना दस दिनों तक सेवन करने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है।

9- मूली के पत्तो में भरपूर मात्रा में एंटी-कंजेस्टिव गुण होते है जो खांसी और कफ को दूर करने में मदद करते है।

10- मूली के पत्तों में ऐसे कई गुण होते हैं, जो रक्त में शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करते हैं। इसके लिए आप मूली के पत्तों का साग बनाएं और उसका सेवन करें।

11- मूली के पत्तों का रस गुर्दे की पथरी को पिघलाने और मूत्राशय को साफ करने में मदद करता है।

12- मूली के पत्तों में मौजूद पोषक तत्व और रोगाणुरोधी और जीवाणुरोधी गुण शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने में मदद करते हैं।

इसलिए दोस्तों मूली के पत्तों को न फेंके बल्कि इसके स्वास्थ्य लाभ उठाएं


By Ashok Sachdeva

गया मर्द जो खाई खटाई, गई नार जो खाई मिठाई

 

'गया मर्द जो खाई खटाई, गई नार जो खाई मिठाई' इस कहावत का साधारण अर्थ और गूढ़ अर्थ क्या है?

इस कहावत को प्रायः बड़े सामान्य अर्थ में ले लिया जाता है और मजाक तक ही सिमित कर दिया गया है। पर ऐसा नहीं है, अपितु इसका हम सब के जीवन से बहुत ही गहरा और चिकित्स्कीय सम्बन्ध है। यह कहावत कह सकते हैं कि आयुर्वेदिक नुश्खा है :

'गया नर जो खाय खटाई, गई नर जो खाय मिठाई'

गया नर जो खाय खटाई : वह नर मरे हुवे के सामान है जो अत्यधिक मात्रा में खट्टे का सेवन करता है। तात्पर्य यह कि, बहुत ही ज्यादा खट्टी वस्तुओं का सेवन करने से पुरुष को शुक्रमेह अर्थात धातु रोग का शिकार हो जाने की सम्भावना रहती है। और शुक्रमेह से पीड़ित ब्यक्ति का स्वास्थय क्रमशः क्षीण होता जाता है। चेहरा निश्तेज और शरीर धीरे धीरे कृशकाय हो जाता है। उनका पूरा जीवन का ढांचा ही बदल जाता है।

इसी प्रकार, गई नर जो खाय मिठाई : वह स्त्री मरे हुवे के सामान है जो अत्यधिक मात्रा में मिठाई का सेवन करती है। क्योंकि, अत्यधिक मात्रा में स्त्री द्वारा मिठाई का सेवन करने के उपरांत श्वेत प्रदर नामक बीमारी लग जाने की सम्भावना होती है। बोलचाल की भाषा में इसे सफ़ेद पानी आना भी कहते हैं और प्रायः यह देखा जाता है कि इसे एक सामान्य प्रक्रिया मान कर नजर अंदाज कर दिया जाता है। जबकि यह स्राव बढ़ने पर वे अत्यंत क्षीण और दुर्बल हो जाती है जिससे जीवन कष्टकर हो जाता है।

Friday, October 23, 2020

ईश्वर प्राप्ति के पंच सूत्र

      हिमालय में रहकर वर्षों की अखंड तपस्या सम्पन्न कर संत शांतिदेव सविकल्प समाधि की अवस्था से अभी-अभी बाहर निकले थे। समाधि की चरम व गहन अवस्था में पहुँचकर उनकी आत्मा ब्रह्मज्ञान की ज्योति से जगमगा चुकी थी। उनकी आत्मा में परमात्मा का प्रकाश, उतर आया था और उनके हृदयसागर में करुणा, प्रेम, क्षमा सत्य आदि ईश्वरीय गुणों की ऊँची-ऊँची लहरे उठ रही थीं और उन ऊँची-ऊँची लहरों के बीच बैठे संत शांतिदेव मानो सम्पूर्ण सृष्टि, सम्पूर्ण ब्रह्मांड कर आलिंगन कर रहे थे।

      वे अपने शरीररूपी पिंड में ही सम्पूर्ण ब्रह्मांड का दिग्दर्शन कर रहे थे और उससे निस्सृत दिव्य एवं ईश्वरीय आनंद का आत्मिक अनुभूति कर रहे थे। अपने खुले हुए नेत्रों से वे ऊँचे नीले गगन को निहार रहे थे और उसी नीले गगन में चमकते, जगमगाते सूर्य, चंद्र, तारे आदि सबको अपने अंतस् के आकाश में चमकने, दमकने की प्रत्यक्ष अनुभूति कर रहे थे। उनके रोम-रोम में आनंद भरी पुलकन की एक दिव्य सिहरन हुए जा रही थी।

      इसी आत्मिक भावदशा में घंटों बैठे-बैठे वे इस जगत को साक्षीभाव से, द्रष्टाभाव से निहार रहे थे। इस जगत के सम्पूर्ण प्राणियों को स्नेह व करुणाभरी दृष्टि से देख रहे थे। जगत के कल्याण हेतु उनके मन में दिव्य प्रेरणायें कहीं ऊँचे लोक से उतर रही थीं। वे सोच रहे थ कि जगत के लोगों के कल्याण हेतु उन्हें अवश्य ही कुछ करना चाहिए। शायद उनके लिए यह ईश्वरीय संदेश भी था और प्रेरणा भी।

      इसी दिव्य संदेश व प्रेरणा को हृदय में धारण किए हुए वे हिमालय से नीचे उतरे और अगले ही दिन जन-जन के बीच जाकर ज्ञान का अलख जगाने को निकल पड़े। कई तीर्थों की यात्रायें करते हुए, भ्रमण करते हुए वे जन-जन के बीच जाकर उन पर परमात्मा के अमृततुल्य ज्ञान का अभिसिंचन करने लगे। चलते-चलते वे गंगा तट पर पहुँचे और फिर वहीं एक छोटी-सी कुटिया बनाकर रहने लगे। अपनी नियमित तप साधना से निवृत्त होकर वे अपना शेष समय प्रायः लोगों को ईश्वर का अमृतमय उपदेश, संदेश देने में ही बिताया करते थे।

      उस समय सोमवती अमावस्या होने के कारण गंगा तट पर लोगों की बड़ी भारी भीड़ उमड़ आयी थी। लोग गंगा स्नान के बाद स्वतः ही संतप्रवर की कुटिया के पास एकत्रित होने लगे थे। देखते-ही-देखते वहाँ हजारों लोग जमा हो गए। सबने संतप्रवर का अभिवादन किया एवं वहीं स्थान ग्रहण किया। वे अभी भी मौन थे, कि तभी उस भीड़ में बैठे एक श्रद्धालु व्यक्ति ने संतप्रवर के चरणों में अपना प्रणाम निवेदित करते हुए कहा- ‘‘भगवन्! हम सब अज्ञानी हैं, हमें शास्त्रों का ज्ञान नहीं है। हम गृहस्थ हैं और गृहस्थी के कार्यों में ही संलग्न रहते हैं। क्या कोई ऐसा मार्ग है, उपाय है, जिसे अपनाकर हम जैसे सामान्य लोग भी ईश्वरप्राप्ति जैसे परम लक्ष्य को पा सकें? भगवन्! अज्ञान पड़े हुए हम जैसे लोगों के संशय का निवारण आप जैसे सर्वगुणसम्पन्न संत व दुर्लभ महात्मा ही कर सकते हैं। इसलिए हे भगवन्! आप हम सब का मार्गदर्शन करें।

      संप्रवर बोले- ‘‘वत्स! यह सम्पूर्ण सृष्टि साक्षात् ईश्वर की ही अभिव्यक्ति है। इस सृष्टि के रूप में, संसार के रूप में परमपिता परमेश्वर स्वयं को ही अभिव्यक्त कर रहे हैं। इसलिए इस जगत को ईश्वर का रूप मानकर इसकी सेवा करना साक्षात् ईश्वर की ही सेवा है। इस सृष्टि में तुम्हारे द्वारा किया गया हर कर्म ही ईश्वर के चरणों में अर्पित हो रही पूजन सामग्री है। इसलिए तुम्हारे द्वारा किए गए प्रत्येक शुभ व पुण्यकर्म ही ईश्वर की सच्ची पूजा है।

      वे आगे बोले- ‘‘ईश्वर ने मानव जीवन के रूप में हम सबको एक बहुमूल्य उपहार दिया है। हमारे पास जो भी समय है, श्रम है, साधन है, प्रतिभा है वह स्वयं के पेट, परिवार प प्रजनन की संकीर्ण परिधि में रहकर, उसे समाप्त कर देने के लिए नहीं है। ईश्वर द्वारा प्रदत्त ये सारे साधन हमें इस सृष्टि की सेवा के लिए मिले हैं, जन-जन की सेवा के लिए मिले हैं। इस संसार में सेवा के बीज बोकर हम औरों के साथ-साथ स्वयं अपना भी भला कर सकते हैं; क्योंकि हमारे द्वारा किए गए सेवा के कार्यों से हमारे चित्त की शुद्धि होती है, जिसमें हमारे लिए एक ओर तो हमारे द्वारा किए गए शुभ कर्मों से जो हमें पुण्य प्राप्त होता है, उससे हमें भौतिक सुख-समृद्धि भी प्राप्त होती है।’’

      संत आगे बोले- ‘‘द्वितीय सूत्र यह है कि तुम सब हमेशा अपनी मृत्यु का स्मरण रखो। यह जीवन क्षणभंगुर है। मृत्यु का स्मरण रखने से तुम इस संसार के प्रति होने वाली आसक्ति के बंधन से मुक्त रह सकोगे।’’ तृतीय महत्त्वपूर्ण सूत्र यह है- ‘‘तुम्हें इस बात का हमेशा स्मरण रहना चाहिए कि ईश्वर सर्वत्र है, सर्वव्यापी है, न्यायकारी है। जो ईश्वर सर्वज्ञ और सर्वव्यापी है, न्यायकारी है; हम हमारे द्वारा किए जाने वाले हर कर्म का साक्षी है। इस बात का स्मरण रहने से तुम सदैव बुरे, अशुभ व पापकर्म करने से बचे रहोगे और हमेशा शुभ कर्म करते रहने से तुम्हें हमेशा शुभ फल, मधुर फल ही प्राप्त होंगे।’’

      संत ने आगे कहा, ‘‘चतुर्थ महत्त्वपूर्ण सूत्र यह है कि सम्पूर्ण प्राणियों के प्रति कोमलता का व्यवहार करना, व्यवहार में सरल व निश्छल होना, मीठे वचन बोलना, आलस्य-प्रमाद व निंदा चुगली से दूर रहना, देवताओं, पितरों और अतिथियों को उनका भाग देना, सात्त्विक आहार ग्रहण करना, वीतराग पुरुषों का संग करना, उन्हें गुरु रूप में वरण करना, उनकी आज्ञापालन करना एवं नित्य-निरंतर पुण्यकर्मों में लगे रहना आदि निश्चित ही कल्याण के मार्ग हैं। इनसे उद्देश्य की प्राप्ति होने के कुछ संशय नहीं है।’’ वत्स! पंचम सूत्र यह है कि तुम सब हमेशा शास्त्रों का स्वाध्याय करना। शास्त्रों का स्वाध्याय करने से तुममें सदा शुभ विचारों, प्रेरणाओं व संकल्पों का जागरण होगा; जिसके प्रभाव में रहकर तुम सदा सच्चाई के मार्ग पर चल सकोगे और शुभ कर्म कर सकोगे। तुम पर कभी बुरे व अशुभ विचार हावी नहीं हो सकेंगे।

      संतप्रवर के इस अमृतमय संदेश को श्रवण कर वहाँ उपस्थित हजारों लोग स्वयं को धन्य-धन्य महसूस करने लगे। आज उन्हें लग रहा था कि आज जल स्नान के साथ-साथ ब्रह्मोपदेश पाकर सचमुच ही अमृत स्नान भी कर लिया है। संतप्रवर की दिव्य अमृतवाणी को हृदय में धारण किए हुए व उसे अपने जीवन में जीने की सत्प्रेरणा लिए हुए भी श्रद्धालु भक्तगण वहाँ से अपने-अपने गंतव्य को प्रस्थान हुए।

अखण्ड ज्योति जून-2020

Monday, October 19, 2020

हमें सर्दी के मौसम में ज्यादा पेशाब क्यों आती हैं?

 [1] ठंड में बार-बार टॉयलट – ठंड यानी की स्वेटर, कंबल और रजाई के साथ पक्की यारी वाला वक्त। रात में रजाई में घुसने के साथ ही बस ये सोचना के जल्दी से रजाई गर्म हो जाएं और बस फिर कोई भी इसमें से निकलने को ना कह दें। और अगर ऐसे में कोई रजाई में से निकल कर कोई काम करने को कह दे, तो बस फिर तो गुस्सा आना लाज़मी ही हैं।

लेकिन, किसी और काम को तो टाला जा सकता है पर अगर बात हो नेचर कॉल यानी की टॉयलट जाने की, तो उसके लिए तो ना चाहते हुए भी रजाई से बाहर आना ही पड़ेगा।

पर ठंड में बार-बार टॉयलट जाना पड़ता है तो एक सवाल दिमाग में ज़रूर कौंधता है कि आखिर ठंड में बार-बार टॉयलट क्यों जाना पड़ता है?

जी हां, ठंड के मौसम में ये सवाल भी बार-बार दिमाग में आता है कि आखिर ठंड में बार-बार टॉयलट क्यों आता है? और खासकर अगर एसी चल रहा हो तो बस क्या ही कहना ! वैसे आपको बता दूं कि ये बेवजह नहीं होता बल्कि इसके पीछे बहुत ही खास वजह है जो शायद आपको नहीं पता होगी।


जैसे हमारे शरीर में सब कुछ अपने एक प्रोसेस के अनुरूप होता है, जब शरीर को ऊर्जा होती है तो भूख लगने लगती है, जब थकान ज्यादा हो जाती है तो नींद आने लगती है, प्यास लगना इस बात का इशारा होता है कि शरीर को पानी की ज़रूरत है। इसी तरह निवृत्त होने के लिए भी हमारी बॉडी सिग्नल देती है।


ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या ठंड के मौसम में पेशाब ज्यादा आने के पीछे भी कोई ऐसी ही वजह है तो मै आपको बता दूं कि इसके पीछे की वजह बहुत खास है। दरअसल, जब हमे ठंड लगती है तो बॉडी का तापमान सामान्य की तुलना में गिरने लगता है। ऐसे में शरीर में गर्मी को बनाए रखने के लिए हमारी बॉडी शरीर के कुछ हिस्सों में, जैसे कि हथेली और पैर के तलवों में खून का फ्लो कम कर देती है।


अब जब ब्लड के फ्लो का एरिया पहले से कम हो जाता है तो ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है। क्योकि ब्लड का अमाउंट तो सेम होता है लेकिन एरिया कम हो जाता है, इसलिए ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है।

बढ़ते ब्लड प्रेशर से शरीर को सुरक्षित रखने के लिए हमारी किडनी सामान्य से ज्यादा काम करना पड़ता है। और इसलिए हमारी किडनी ब्लड को प्यूरिफाई करने का काम तेज़ कर देती है।

अब ये तो स्पष्ट है कि अगर खून प्यूरिफाई ज्यादा होगा तो अपशिष्ट पानी भी ज्यादा निकलेगा। यही अपशिष्ट पानी गॉल ब्लैडर में जमा हो जाता है और इसी वजह से ठंड में बार-बार टॉयलट आती है।

तो ये हुई पूरी थ्योरी। अब कुछ लोग ऐसे में पानी पीना छोड़ देते हैं जिससे की टॉयलट कम आएं लेकिन ये पूरी तरह से गलत है।

क्योकि अगर आप पानी पीना छोड़ देते हैं तब भी किडनी उसी तरह अपना काम करती है लेकिन ऐसे में पेशाब पीली आने लगती है जो स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है।


इन वजहों से ठंड में बार-बार टॉयलट आता है – तो अब आगे से कोई पूछे कि ठंड में सूसू ज्यादा क्यों आती है तो बिना देर किए उन्हे ये जानकारी पढ़वा दीजिएगा ताकि उनका भी ज्ञान बढ़े।

और आपको यह जानकारी अच्छी लगी हो तो इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करें और ऐसे ही जानकारी से भरपूर आर्टिकल पढ़ने के लिए मुझे फॉलो जरूर करें।

धन्यवाद

Priya Sharma

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बाल झड़ना रोकने के लिए कारगर घरेलू उपाय

 संतुलित और पौष्टिक आहार लें । बालों के लिए अलसी के बीज, अखरोट, बादाम और देशी घी विशेष लाभदायक हैं । नियमित रूप से इनका सेवन करें ।

➤ एक कप लौकी के जूस में दो चम्मच आँवले का जूस मिलाकर प्रतिदिन सेवन करें । इससे बाल स्वस्थ और मजबूत होंगे ।

➤ आँवला, जैतून, बादाम अथवा नारियल के तेल से सप्ताह में एक या दो बार उँगलियों के पोरों से बालों की जड़ों में आहिस्ते - आहिस्ते मालिश करें ।

➤ जैतून, अरंडी और नारियल का तेल बराबर मात्रा में लेकर गुनगुना कर लें । इसे रात में लगाकर सुबह बाल धो डालें । ऐसा महीने में एक बार करें ।

➤ महीने में दो बार गो - मूत्र में थोड़ा सा पानी मिलाकर बाल धोएँ । यह दिव्य और प्राकृतिक कंडीशनर है । इससे बाल घने, काले, चमकदार और मजबूत बनेंगे ।

➤ मुल्तानी मिट्टी को खूब महीन पीस कर छान लें । फिर इसे कई दिन के रखे हुए खट्टे दही में मिला कर बालों में अच्छी तरह से लगाएँ और दो घंटे बाद धो डालें । बालों के लिए अदभुत और चमत्कारिक है ।

➤ 4-5 चम्मच मेथीदाना एक कप पानी में रात में भिगो दें । सुबह इसे उबाल कर छान लें । अब इस पानी में दो चम्मच अरंडी का तेल (कैस्टर ऑयल) मिलाकर बालों में अच्छे से लगाएँ और ऊपर से तौलिया लपेट लें । उसके दो घंटे बाद बालों को धो डालें । ऐसा सप्ताह में दो बार करें । इससे बालों का झड़ना रुकेगा और बाल मजबूत होंगे ।

➤ आधा कप नारियल के तेल में एक मुट्ठी करी पत्ता डालकर इतना पकाएँ कि पत्ते काले हो जाएँ । उसके बाद तेल को छानकर उससे बालों की मालिश करें और एक घंटे बाद धो डालें ।

➤ किसी ताँबे के बर्तन में दही रख कर उसे पाँच दिन के लिए छोड़ दें । पाँच दिन बाद आप देखेंगे कि दही का रंग हरा हो गया है । अब इस दही को उसी बर्तन में अच्छी तरह घोटकर गंजे हो चुके स्थान पर लगाएँ । कुछ दिन ऐसा करने से वहाँ बाल फिर से उग आएँगे । यह प्रयोग स्त्री - पुरुष दोनों कर सकते हैं । दाढ़ी के गंजेपन में भी इसे लगा सकते हैं ।

➤ प्याज कूटकर उसका रस निकाल लें । अब एक कटोरी में दो चम्मच प्याज का रस लें । उसमें एक चम्मच नारियल का तेल, आधा चम्मच एलोवेरा जेल तथा आधा चम्मच नींबू का रस मिलाएँ । इसी में विटामिन ई - 600 का एक कैप्सूल भी काटकर मिला लें । रात में सोने से पहले इसे बालों में लगाएँ और सुबह धो डालें । ऐसा हफ्ते में दो बार करें । इससे बाल घने, लंबे, काले व मजबूत होंगे । बालों का झड़ना बन्द होगा ।

➤ एक कप नारियल का तेल लेकर कड़ाही में गर्म करें । इसमें ततैया (बर्र या भिड़) का एक बड़ा छत्ता और चौथाई कप गुड़हल के पत्तों का रस डाल कर अच्छी तरह पकाएँ । इस तेल को छान कर रात में बालों में लगाएँ और सुबह धो डालें । यह प्रयोग हफ्ते में दो बार करें । कुछ ही दिनों में बालों का झड़ना बंद हो जाएगा । नए बाल भी उगेंगे ।

➤ एक कप नारियल के तेल में पाँच गुड़हल के फूल डालकर इतना पकाएँ कि फूल जलकर कोयला हो जाएँ । इसे छान कर रात में बालों में लगाएँ और सुबह धो डालें । बालों की बहुत उत्तम औषधि है ।

➤ एलोवेरा के पत्तों को छील कर एक कप उसका गूदा निकालें । इसमें एक कप नारियल का तेल मिलाकर अच्छी तरह पका लें । फिर इसे छान कर किसी शीशी में भरकर रख लें । हफ्ते में दो बार यह तेल लगाने से बालों की खुश्की और रूसी दूर होगी । बाल मजबूत होकर उनका झड़ना रुकेगा । एलोवेरा बालों के लिए बहुत अच्छी औषधि है ।

➤ दो चम्मच नारियल का तेल लेकर उसमें एक चम्मच आँवला पाउडर और एक चममच प्याज का रस मिला लें । रात में बालों की जड़ों में इसकी अच्छे से मसाज करें और सुबह धो डालें । इससे बाल मजबूत भी होंगे और काले भी ।

➤ आधा कप नारियल के तेल में 4 आँवले के टुकड़े करके पकाएँ । जब आँवले जलकर काले हो जाएँ तो उन्हें उसी में खूब अच्छी तरह घोट कर बालों में लगाएँ । उसके एक - डेढ़ घंटे बाद धो डालें । इससे बाल घने, लंबे और मजबूत होंगे । नए बाल आएँगे और सफेद बाल काले भी होंगे । पुरुषों की दाढ़ी में गंजापन हो तो भी यह प्रयोग अत्यंत कारगर है ।

➤ पुरुषों की दाढ़ी में यदि गंजे पैचेज हों तो कैस्टर ऑयल को हल्का गुनगुना करके रोज लगाएँ । कुछ दिन में नए बाल निकाल आएँगे ।

ये तो हुए बालों का झड़ना रोकने के कुछ प्रमुख उपाय | परन्तु बालों की समस्या को जड़ से समाप्त करने के लिए बालों के बारे में और भी बहुत कुछ जानना - समझना जरूरी है | बालों के सम्पूर्ण समाधान के लिए मेरे ब्लॉग के इस लिंक पर जाकर अवश्य पढ़ें - बालों की संपूर्ण सुरक्षा (FULL HAIR PROTECTION)

    with thanks from


LAYAK RAM MANAV

Thursday, October 15, 2020

कमलककड़ी खाने के लाभ

 

 

मल ककड़ी खाने के हैं बेमिसाल फायदे, सिर से लेकर पैरों तक के लिए है फ़ायदेमं

कमल ककड़ी खाने से शरीर में कई बीमारियों के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है।

कमल ककड़ी खाने के हैं बेमिसाल फायदे, सिर से लेकर पैरों तक के लिए है फ़ायदेमंद कमल ककड़ी पोषक तत्वों का ख़ज़ाना है। सेहत के लिए इसे खाना बहुत ही फ़ायदेमंद है और इसका सेवन करने से शरीर के हर अंग को फायदा पहुँचाता है। कमल ककड़ी खाने से शरीर में कई बीमारियों के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है। कमल ककड़ी में भरपूर मात्रा में शरीर को फायदा पहुंचाने वाले विटामिन, मिनरल्स और अन्य पौषक तत्व मिलते हैं जो बीमारियों को दूर करते हैं।

1.कमल ककड़ी में भरपूर मात्रा में एंटिऑक्सिडेंट होते हैं और इसे खाने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है वहीं कमल ककड़ी खाने से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से बचाव में मदद मिलती है।

2.इसे खाने से ब्लड शुगर का लेवल भी अनुकूल रहता है। डायबटिक लोगों को रोज़ाना इसका सेवन करना चाहिए यह शरीर के ग्लूकोज़ लेवल में भी सुधार करता है।

3.नियमित रूप से कमल ककड़ी खाने से शरीर में कैलोरी की मात्रा भी बराबर रहती है और इसे खाने के बाद कापी देर तक भूख भी नहीं लगती।

4.कमल ककड़ी खाने से शरीर का ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाने में सहायता मिलती और बॉड़ी का एनर्जी लेवल भी मेंटेन रहता है।

5.इसमें भरपूर मात्रा में मौजूद आयरन के कारण शरीर के रेड ब्लड सेल्स की कमी नहीं होती यानी की खून की कमी नहीं रहती है।

6.कमल ककड़ी में मौजूद विटामिन ए, विटामिन बी और विटामिन सी के एक अच्छे लेवल के कारण शरीर की इम्यूनिटी पॉवर भी डेवलप होती है।

7.किसी व्यक्ति को बुखार होने पर कमल ककड़ी खानी चाहिए। अगर ऐसा कर लिया जाए तो किसी दवाई की जरूरत नहीं पड़ती है और बुखार में तुरंत आराम मिलता है।

8.हाथ पैरों में होने वाली सूजन, जोड़ों के दर्द और मांसपेशियों की सूजन में यह आराम दिलाती है। हड्डियों से जुड़े रोगों को यह जड़ से खत्म कर देता है।

9.सर्दियों में कमल ककड़ी खाने से त्वचा संबंधी रोग नहीं होते हैं और त्वचा का फटना, रूखा पड़ना आदी समस्याओं से छुटकारा मिलता है।

10.कमल ककड़ी खाने से शरीर का टाक्सिन दूर होता है और पथरी होने की संभवनाओं पर रोक लगाई जा सकती है।

स्त्रोत गूगल.


Wednesday, October 14, 2020

मीठी नीम (कड़ी पत्ता) खाने का लाभ

 

मीठी नीम (कड़ी पत्ता) खाने का क्या लाभ होगा ?

कड़ी पत्ते का इस्तेमाल ज्यादातर घरों में किया जाता है। अगर आपको लगता है कि इसके इस्तेमाल से केवल भोजन का स्वाद बढ़ता है तो आपका सोचना गलत है इसके और भी कई सेहत और सौन्दर्य संबंधित फायदे है।

कड़ी पत्ता खाने के फायदे:

  • अगर आप डायबिटीज के रोगी हैं, तो कड़ी पत्ता अपने भोजन में शामिल करें। इससे आप इस समस्या से आसानी से छुटकारा पा सकते हैं। ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए भी यह फायदेमंद है।
  • कफ होने, कफ सूख जाने या फेफड़ों में जमाव की स्थिति में कड़ी पत्ता आपके लिए मददगार है। इसके लिए कड़ी पत्ते को पीसकर या इसका पाउडर शहद के साथ सेवन करें।
  • आयरन और फॉलिक एसिड का एक बेहतरीन स्रोत है कड़ी पत्ता। यह आपके शरीर का आयरन सोखने में मदद करता है और एनीमिया जैसी सम्स्याओं से आपको बचाता है। रोजाना खालीपेट कड़ी पत्ता और खजूर खाने से आपको लाभ होता है।
  • किसी भी तरह की त्वचा संबंधित समस्याओं में कड़ी पत्ता फायदेमंद है। अगर आप लंबे समय से मुहांसे या अन्य समस्याओं से परेशान हैं तो हर रोज कड़ी पत्ता खाएं या इसका पेस्ट बनाकर लगाएं।
  • बालों को घना, काला और मजबूत बनाने के लिए आप कड़ी पत्ते का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए आप नारियल तेल में कड़ी पत्ते को उबालकर उस तेल को बालों में लगाएं और उससे अच्छी तरह से मालिश करें।
  • पाचन संबंधी समस्या हो या दस्त से संबंधित समस्या हो। कड़ी पत्ते को पीसकर छाछ में मिलाकर पिएँ। यह पेट की गड़बड़ी को सही करता है और पेट से संबंधित सभी समस्याओं को हल निकालता है।
  • शरीर में खून की कमी के कारण एनीमिया होता है और इस रोग से निजात पाने के लिए कड़ी पत्ते का सेवन फायदेमंद होता है। इसमें अधिक मात्रा में आयरन और फोलिक एसिड होता है जो एनीमिया पर प्रभावी रूप से काम करता है।
  • कड़ी पत्ते को चबाने से वजन कम होता है। बेहतर पाचन, विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालना, बेहतर कोलेस्ट्रॉल का स्तर आदि चीज़ों में मदद करता है |
  • कड़ी पत्ते में डाइक्लोरोमेथेन, एथिल एसीटेट और महानिम्बाइन जैसे तत्व पाए जाते हैं। इन तत्वों में वजन घटाने, कोलेस्ट्रॉल कम करने और ट्राइग्लिसराइड (फैट का एक प्रकार) के स्तर को नियंत्रित करने की क्षमता होती है इसलिए कड़ी पत्ते का उपयोग वजन घटाने में किया जाता है।
  • कड़ी पत्ता एक हर्बल औषधि है, जो विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से समृद्ध होता है। कड़ी पत्ते से ब्लड कोलेस्ट्रॉल कम होता है। यह दिल की बिमारियों से दूर रखता है।
  • इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण कोलेस्ट्रॉल का ऑक्सीकरण होने से रोकते हैं। इससे बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा नहीं बढ़ती और दिल से जुड़ी परेशानियों का खतरा भी कम होता है।
  • कड़ी पत्ते के तेल में पाए जाने वाले कुछ खास पोषक तत्वों में एंटीबायोटिक और एंटीफंगल गुण पाए जाते हैं। इसमें पाए जाने वाले यही गुण बैक्टीरिया और फंगल प्रभाव को कम करने में लाभकारी हैं । जिसके कारण यह संक्रमण से बचाता है।
  • कड़ी पत्ता सुबह-सुबह होने वाली कमजोरी, मतली और उल्टी से लड़ने में सहायक है। यह पाचन क्रिया को बढ़ाता है जो इन बीमारियों से लड़ने में मदद करता है।
  • कड़ी पत्ते में पाए जाने वाले कार्बाजोले एल्कलॉइड्स से डायरिया में मदद मिलता है इसलिए इसका नियमित सेवन डायरिया जैसी समस्या से निजात पाने में मदद देता है।
  • कड़ी पत्ते में टैनिन और कारबाजोले एल्कलॉइड जैसे तत्व मौजूद होते हैं। इन तत्वों में हेप्टोप्रोटेक्टिव गुण पाए जाते हैं, जो लिवर की कार्यक्षमता को बढ़ाने में मददगार है, साथ ही साथ उससे संबंधित हेपेटाइटिस और सिरोसिस जैसे जोखिमों को कम करता हैं।
  • कड़ी पत्ते की तासीर ठंडी होती है, इसलिए ये बवासीर रोग के इलाज में मददगार है। कड़ी पत्ते को पानी के साथ पीसें फिर इसे छानकर पानी निकाल ले। इसे पीने से बवासीर, दस्त, डायरिया, पेट के रोग और पाचन की दिक्कतें ठीक होती हैं।
  • कड़ी पत्ता आँखों की रोशनी के लिए फायदेमंद है, कढ़ी पत्ते में मौजूद कैरोटीनॉयड, कॉर्निया की सेहत को सुधारने में मदद करता है। यह आँखों की रोशनी तेज करता है और मोतियाबिंद होने की संभावना कम करता है।
  • कड़ी पत्ते में विटामिन-सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो इम्युनिटी को सुधारने में मदद करता है। इसके साथ ही कढ़ी पत्ते में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट फ्री रेडिकल से लड़ने में मदद करते हैं। कड़ी पत्ते में एंटी- बैक्टीरियल, एंटी- माइक्रोबियल और एंटी- फंगल गुण होते है।

इसी तरह स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों के लिए आप blog(.)medcords(.)com पर ब्लॉग पढ़ सकते है।

टेक्सीचालक देबेन्द्र

 तस्वीर दिल्ली के एक साधारण टेक्सीचालक देबेन्द्र की है.

देबेन्द्र मूलतः बिहार के रहने वाले हैं.....

एक दिन देबेन्द्र की टैक्सी में काश्मीर का निवासी बैठा....उसे एयरपोर्ट से पहाड़गंज तक जाना था। देबेन्द्र ने उसको पहाड़गंज छोड़ा...... अपना किराया वसूला.. और वापिस टैक्सी स्टैंड की ओर चल पड़े। इसी बीच उनकी नज़र गाड़ी में पड़े एक बैग पर गयी।

बैग को उठाया तो समझने में क्षण भर भी ना लगा के यह सवारी का बैग है...... जिसे कुछ ही समय पहले वह पहाड़गंज छोड़ कर आये हैं। बैग को खंगाला तो देबेन्द्र दंग रह गये।

बैग में कुछ स्वर्ण आभूषण, एक एप्पल का लैपटॉप, एक कैमरा और कुछ नगद पैसे थे......

सब कुछ मिला के लगभग 7 या 8 लाख का सामान था।।

एक दम देबेन्द्र की आँखों के सामने फाइनेन्सर की तस्वीर आ गयी। इतने आभूषण बेच कर तो कर्जा आसानी से उतर सकता था। एक दम से प्रसन्न हो उठे।

मन में बैठा रावण जाग उठा। पराया माल अपना लगने लगा।

परन्तु जीवन की यही तो विडम्बना है।

मन में राम और रावण दोनों निवास करते हैं।

कुछ ही दूर गये थे के मन में बैठे राम जाग उठे। देबेन्द्र को लगा के वह कैसा पाप करने जा रहे थे।

नैतिकता आड़े आ गयी।

बड़ी दुविधा थी। एक ओर आभूषण सामने पड़े थे और दूजी ओर अपनी अंतरात्मा खुद को ही धिक्कार रही थी।

कुछ देर द्वंद चला पर अंत में विजय राम की ही हुई। देबेन्द्र पास के पुलिस स्टेशन गये और बैग ड्यूटी पर मौजूद थानेदार के हाथ में थमा दिया।

अब थानेदार कभी बैग में पड़े आभूषण देखे और कभी देबेन्द्र का चेहरा देखे.....थानेदार ने कहा के तू अगर चाहता तो यह बैग लेकर भाग सकता था।

देबेन्द्र ने जवाब दिया साहब हम "गरीब" हैं "बेईमान" नहीं हैं।

थानेदार भी निःशब्द हो गया। उसे लगा पता नहीं यह आदमी किस मिट्टी का बना है।

ख़ैर सवारी को उसका बैग सकुशल वापिस मिल गया। देबेन्द्र कि ईमानदारी के इनाम के रूप में मालिक ने उसे कुछ रुपये देने की पेशकश की तो देबेन्द्र ने साफ मना कर दिया।

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असल कथा अब शुरू होती है –

थानेदार ने देबेन्द्र की ईमानदारी की गाथा एक मीडियाकर्मी के आगे सुना दी ।

मीडियाकर्मी भी थानेदार की तरह अवाक रह गया। उसने देबेन्द्र की ईमानदारी की खबर अखबार में छापने की ठान ली ।

वह देबेन्द्र से मिला और उसका साक्षात्कार लेते हुये पूछा के अगर बैग में पड़े सामान की कीमत (8 लाख रुपये) उसे मिल जायें तो वह क्या करेगा।

देबेन्द्र ने आपबीती सुना दी। उसने कहा के पहले तो फाइनेन्सर का कर्जा चुकाएगा और फिर अगर सम्भव हुआ तो एक टैक्सी खरीदेगा।

पहले थानेदार हैरान हुआ था अब रिपोर्टर महोदय हैरान हो गये।

रिपोर्टर ने कहा के तेरे सर पर कर्ज़ है तो तू बैग लेकर भाग क्यों नहीं गया।

देबेन्द्र ने रिपोर्टर महोदय से भी कहा के साहब, हम गरीब हैं पर बेईमान नहीं हैं।

थानेदार की तरह अब रिपोर्टर को भी लगा के यह आदमी किस मिट्टी का बना है।

रिपोर्टर ने देबेन्द्र की ईमानदारी की गाथा एफ एम चैनल के एक रेडियो जॉकी को बताई।

एफ एम रेडियो के ज़रिए देबेन्द्र की कहानी दिल्लीवासियों को सुना दी गई...

साथ ही साथ दिल्ली वालों को देबेन्द्र के कर्ज के विषय में भी बताया। इसी के साथ एक खाता नम्बर भी दे दिया.... जिसमे धनराशि डाल कर वह ईमानदार देबेन्द्र का कर्ज़ा उतारने में उसकी मदद कर सकते थे।

2 घँटे......

मात्र 120 मिनट में

दिल्ली ने देबेन्द्र के खाते में 91751 रुपये डलवा दिये।

टोटल 8 लाख रुपये मिले मात्र 2 दिन में।।

सबने अपनी हैसियत के हिसाब से पैसा दिया........... और दिलवाली दिल्ली ने देबेन्द्र की ईमानदारी के उपहार में उसे ऋण मुक्त कर दिया।

लाखों लोगों ने देबेन्द्र की ईमानदारी को सराहा....

देबेन्द्र आज भी कहते हैं के मन के रावण को राम पर हावी ना होने देना उनके जीवन की सबसे बड़ी जीत थी। अगर वह बैग लेकर भाग जाते तो कर्ज़ा तो उतार लेते पर खुद को कभी माफ ना कर पाते।

मैं मानता हूँ के मन में बैठा रावण आज की व्यवस्था में हावी है। परन्तु बारीकी से देखें तो मन में बैठा राम आज भी दशानन का वध करने में सक्षम है।

अच्छाई और बुराई मे आज भी धागे भर का फासला है। इस ओर गये तो राम.....और उस ओर गये तो रावण।

देबेन्द्र ने दिल की सुनी और दिमाग के तर्क को नकार दिया।

दिल से सोचने वालों के लिये एक बड़ी खूबसूरत बात कही गयी है –

"दिल होता "लेफ्ट" में है....पर होता हमेशा राइट है..

यकीन न हो तो गूगल कर लीजिए कहानी बिल्कुल सच है।

with thanks Vipin Kumar

Saturday, October 10, 2020

प्राचीन स्वास्थ्य दोहावली

 

हमेशा निरोगी बने रहने के लिए किन प्रमुख बातों का ध्यान रखना चाहिए ?

हमेशा निरोगी बने रहने के लिए निम्न प्रमुख बातों का ध्यान रखना चाहिए -

पानी में गुड डालिए, बीत जाए जब रात!

सुबह छानकर पीजिए, अच्छे हों हालात!! 1!!

*धनिया की पत्ती मसल, बूंद नैन में डार!*

दुखती अँखियां ठीक हों, पल लागे दो-चार!! 2!!

*ऊर्जा मिलती है बहुत, पिएं गुनगुना नीर!*

कब्ज खतम हो पेट की, मिट जाए हर पीर!! 3।।

*प्रातः काल पानी पिएं, घूंट-घूंट कर आप!*

बस दो-तीन गिलास है, हर औषधि का बाप!! 4!!

*ठंडा पानी पियो मत, करता क्रूर प्रहार!*

करे हाजमे का सदा, ये तो बंटाढार!! 5!!

*भोजन करें धरती पर, अल्थी पल्थी मार!*

चबा-चबा कर खाइए, वैद्य न झांकें द्वार!! 6!!

*प्रातः काल फल रस लो, दुपहर लस्सी-छांस!*

सदा रात में दूध पी, सभी रोग का नाश!! 7!!

*प्रातः- दोपहर लीजिये, जब नियमित आहार!* तीस मिनट की नींद लो, रोग न आवें द्वार!! 8!!

*भोजन करके रात में, घूमें कदम हजार!*

डाक्टर, ओझा, वैद्य का , लुट जाए व्यापार !! 9!!

*घूट-घूट पानी पियो, रह तनाव से दूर!*

एसिडिटी, या मोटापा, होवें चकनाचूर!! 10!!

*अर्थराइज या हार्निया, अपेंडिक्स का त्रास!*

पानी पीजै बैठकर, कभी न आवें पास!! 11!!

*रक्तचाप बढने लगे, तब मत सोचो भाय!*

सौगंध राम की खाइ के, तुरत छोड दो चाय!! 12!!

*सुबह खाइये कुवंर-सा, दुपहर यथा नरेश!*

भोजन लीजै रात में, जैसे रंक सुरेश!! 13!!

*देर रात तक जागना, रोगों का जंजाल!*

अपच,आंख के रोग सँग, तन भी रहे निढाल !!14!

*दर्द, घाव, फोडा, चुभन, सूजन, चोट पिराइ!*

बीस मिनट चुंबक धरौ, पिरवा जाइ हेराइ!! 15!!

*सत्तर रोगों कोे करे, चूना हमसे दूर!*

दूर करे ये बाझपन, सुस्ती अपच हुजूर!! 16!!

*भोजन करके जोहिए, केवल घंटा डेढ!*

पानी इसके बाद पी, ये औषधि का पेड!!,17!!

*अलसी, तिल, नारियल, घी सरसों का तेल!*

यही खाइए नहीं तो, हार्ट समझिए फेल! 18!!

*पहला स्थान सेंधा नमक, पहाड़ी नमक सु जान!*

श्वेत नमक है सागरी, ये है जहर समान!! 19!!

*अल्यूमिन के पात्र का, करता है जो उपयोग!*

आमंत्रित करता सदा, वह अडतालीस रोग!!20!!

*फल या मीठा खाइके, तुरत न पीजै नीर!*

ये सब छोटी आंत में, बनते विषधर तीर!!21!!

*चोकर खाने से सदा, बढती तन की शक्ति!*

गेहूँ मोटा पीसिए, दिल में बढे विरक्ति!!22!!

*रोज मुलहठी चूसिए, कफ बाहर आ जाय!*

बने सुरीला कंठ भी, सबको लगत सुहाय!!23!!

*भोजन करके खाइए, सौंफ, गुड, अजवान!*

पत्थर भी पच जायगा, जानै सकल जहान!!24!!

*लौकी का रस पीजिए, चोकर युक्त पिसान!*

तुलसी, गुड, सेंधा नमक, हृदय रोग निदान!25!!

*चैत्र माह में नीम की, पत्ती हर दिन खावे !*

ज्वर, डेंगू या मलेरिया, बारह मील भगावे !!26!!

*सौ वर्षों तक वह जिए, लेते नाक से सांस!*

अल्पकाल जीवें, करें, मुंह से श्वासोच्छ्वास!!27!!

*सितम, गर्म जल से कभी, करिये मत स्नान!*

घट जाता है आत्मबल, नैनन को नुकसान!!28!!

*हृदय रोग से आपको, बचना है श्रीमान!*

सुरा, चाय या कोल्ड्रिंक, का मत करिए पान!!29!!

*अगर नहावें गरम जल, तन-मन हो कमजोर!*

नयन ज्योति कमजोर हो, शक्ति घटे चहुंओर!!20!!

*तुलसी का पत्ता करें, यदि हरदम उपयोग!*

मिट जाते हर उम्र में,तन में सारे रोग।21!!

स्त्रोत-

प्राचीन स्वास्थ्य दोहावली

हिन्दू जागृति समिति

क्रमांक संख्या०५