Tuesday, April 7, 2015

भारत की महिलाएॅं संस्कृति की कब्र न खोदें

            देवसत्ताओं ने अपने तपोबल से नारियों को समाज की गुलामी की जंजीरों से मुक्त कर एक बड़ा कार्य किया है। परन्तु इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत की नारियाॅं समाज व संस्कृति की मर्यादा को ताक पर रखकर मनमाने वस्त्र पहनें व मनमानी हरकतें करें। यदि ऐसा होता है तो पूरा भारत का युवा वासना के आवेश में बहकर संस्कृति व समाज को तहस-नहस कर डालेगा। इसका उत्तरदायित्व व दोष किसके सिर पर आएगा? निश्चित रूप् से उन लड़कियों को व उनके माॅं-बाप को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा। इतनी सामाजिक व धार्मिक संस्थाएॅं भारत में हैं परन्तु इस मुद्दे पर चुप हैं। कड़ाई से नारी शक्ति को अनुशासित करने का प्रयास नहीं कर रहे हैं। हम सभी को बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं के साथ बेटी को शालीन बनाओं का नारा भी जोड़ना पड़ेगा अन्यथा इसका भारी खमियाजा भारत के समाज को भुगतना पड़ेगा।

            जो नारियाॅं भारत के समाज में पवित्रता लाने में अपना योगदान नहीं दे सकती उन्हें देवी कैसे माना जा सकता है। वो तो मानव रूप् में साक्षात् सूर्पनखा हैं। राक्षस हैं व कुल व संस्कृति की कब्र खोदने पर उतारू हैं। विज्ञान के दुरुप्रयोग से हवा पानी प्रदूषित हो गए किसानो द्वारा फसलों, अनाजों, में विषाक्त तत्वों की वृशी कर दी गयी| हे देवी! तुमसे देवसत्ताओं को बहुत आशाएं थी की तुम अपने देवत्व से इन विषों का निवारण करोगी परन्तु तुमने भी अज्ञान वश अपनी हरकतों से अश्लीलता का विष समाज में घोलना प्रारंभ कर दिया| जो रही सही कसर भी वो तुमने पूरी कर डाली| चेतो! हे देवी! चेतो! वासना के आवेश में यदि तुम भी औरों के समान संवेदनहीन हो जाओगी तो भारत माता के आंसू कौन पोंछेगा| देव संस्कृति को बचने वाली शक्ति, भक्ति, पवित्रता, दिव्यता की मूर्त! हे भारत की नारी अपने मूल सवरूप को पुनः धारण करो जिससे तरह तरह के विषों में जलते भारत के पुत्रों को राहत मिल सके व भारत विशव में जगतगुरु बन सके| रक्षक ही अगर भक्षक बन जाएगा तो इस धरा का सर्वनाश हो जायेगा| अत: हे मातरी शक्ति ! करुणा, पवित्रता, उदारता की धाराएं मेरे भारत में बहा दो जिससे स्वार्थ, वासना, महत्वकांक्षा व रोगों से त्रस्त मेरे देशवासिओं के दुःख दूर हो सकें, मेरा आपसे यही निवेदन हैं| 


देवत्व  के फूलों से, धरती को सुगन्धित कर दो। 
करुणा की मूर्ति हो, अमृत से सिंचित कर दो। 
वासनाओ की होली जला, फिर से पवित्रता वरसा दो। 
तुम  हो गुणो की खान, मेरे भारत को स्वर्ग बना दो। 
शक्ति का हो अवतार, सिंह की हुंकार कर दो। 
विकारों से ग्रस्त मानवता, बुराइयों का दमन कर दो।  

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